🎓 उत्तराखंड में शिक्षा सुधार की नई शुरुआत: अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ, मदरसा बोर्ड की जगह नई व्यवस्था लागू

देहरादून | 1 जुलाई 2026

🎯 उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की पहल के तहत राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का औपचारिक शुभारंभ किया। इसी के साथ राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी गई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भी भेंट की गईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय की परंपराओं या पहचान को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सभी बच्चों को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।

📚 1 जुलाई 2026 से लागू हुई नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना के साथ नई शिक्षा व्यवस्था लागू हो गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है और अब शिक्षा के क्षेत्र में भी एक आदर्श मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि राज्य का प्रत्येक बच्चा आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े तथा भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सके।

💻 AI, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर रहेगा विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नवाचार का है। ऐसे समय में यह जरूरी है कि उत्तराखंड का कोई भी विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत बच्चों को विज्ञान, गणित, कंप्यूटर शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि वे बदलते समय के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।

🤝 सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को मिलेंगे समान अवसर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

🇮🇳 राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सोच को मिलेगा विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखती, बल्कि कौशल, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

🌿 शिक्षा से मजबूत होगा समाज और राज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी आधार है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे केवल प्रमाण-पत्र देने तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करें जो ज्ञानवान, संवेदनशील, संस्कारित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित हों।

उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस नई पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देगा और उत्तराखंड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करेगा।