उत्तराखंड में 35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, 700 से बढ़कर 2,200 हुए स्टार्टअप; CM धामी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

देहरादून | 31 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और पर्यटन को लेकर राज्य सरकार की उपलब्धियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विस्तार से अपनी बात रखी। देहरादून में आयोजित ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप, होमस्टे, सीमांत क्षेत्रों के विकास, निवेश और समान नागरिक संहिता (UCC) सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का पक्ष रखा।

🎯 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने का संकल्प लिया था। उस समय प्रदेश में करीब 24 हजार पदों का बैकलॉग था।

उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके बाद अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि इन भर्तियों में सामान्य परिवारों के युवाओं को बिना सिफारिश और भ्रष्टाचार के अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

👩‍🌾 तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं खेती-बाड़ी, पशुपालन और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी योगदान देती हैं।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इन समूहों के माध्यम से सिलाई-बुनाई, मिलेट उत्पाद, पूजा सामग्री, स्थानीय वस्त्र, हस्तशिल्प और त्योहारों से जुड़े उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

📈 उत्तराखंड में 700 से बढ़कर 2,200 हुए स्टार्टअप

युवाओं को अपने प्रदेश में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री ने पर्यटन, होमस्टे, होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, बागवानी और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की बात कही।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तराखंड में स्टार्टअप की संख्या पहले लगभग 700 थी, जो अब बढ़कर करीब 2,200 हो गई है। इसी तरह होमस्टे की संख्या लगभग 4 हजार से बढ़कर 8 हजार से अधिक हो चुकी है।

उन्होंने आदि कैलाश यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि से स्थानीय लोगों को होमस्टे, होटल और परिवहन जैसी गतिविधियों में रोजगार मिल रहा है।

🏔️ सीमांत गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने माणा गांव को देश का अंतिम गांव कहने के बजाय प्रथम गांव के रूप में पहचान देने का संदेश दिया था। इसके बाद सीमावर्ती गांवों में सड़क, संपर्क, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं के विकास को गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर जाने की मजबूरी न रहे।

🌿 विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

हिमालयी राज्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश का 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां हिमालय, ग्लेशियर, वन संपदा और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। गंगा और यमुना जैसी नदियों का उद्गम स्थल होने के कारण पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस वर्ष धराली सहित चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार और चंपावत में भी आपदा की घटनाएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं को केवल अनियोजित निर्माण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। कई दुर्गम इलाकों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहां दूर-दूर तक निर्माण कार्य नहीं हुए हैं। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि भी इसके महत्वपूर्ण कारण हैं।

💍 उत्तराखंड को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड की पहचान लगातार मजबूत हो रही है। मसूरी, रामनगर और मुक्तेश्वर जैसे स्थानों के साथ अन्य क्षेत्रों को भी वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है और वर्ष 2021 की तुलना में प्रदेश का बजट भी काफी बढ़ा है। उनके अनुसार, नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

🏛️ UCC पर बोले धामी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना उद्देश्य नहीं

समान नागरिक संहिता (UCC) पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता के सामने यूसीसी लागू करने का संकल्प रखा गया था, जिसे सरकार ने पूरा किया।

लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इनका उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल देना नहीं, बल्कि ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि पंजीकरण और संबंधित कानूनी प्रावधानों के जरिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

💰 एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग

निवेश के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में अब तक लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है।

इसके अतिरिक्त करीब 24 से 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी चल रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं के रूप में विकसित हो और प्रदेश के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलें।

🚫 युवाओं से बोले मुख्यमंत्री- नशे को कहें ना

मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समाज इससे प्रभावित होता है।

उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्रावासों में पढ़ने वाले युवाओं से मित्रों के दबाव में आकर नशे की शुरुआत नहीं करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए सरकार और पुलिस के साथ अभिभावकों, शिक्षकों तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।

देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखना प्राथमिकता

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के कामकाज का मूल्यांकन जनता उसके परिणामों के आधार पर करती है। उत्तराखंड की जनता जागरूक है और उसकी अपेक्षाएं भी बड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास की गति बनाए रखने के साथ देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, पवित्रता और मूल पहचान को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड तैयार करना है, जहां वर्तमान पीढ़ी को बेहतर अवसर मिलें और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे।