सीएम धामी के जीवन-सफर पर आधारित दो पुस्तकों का लोकार्पण, ‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ को मिला साहित्यिक सम्मान 📚🏔️

राजभवन, देहरादून | 27 नवम्बर 2025

देहरादून के राजभवन का प्रांगण गुरुवार को सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम का स्थल नहीं था, बल्कि एक ऐसे बेटे, एक सैनिक के परिवार, पहाड़ के संघर्ष और एक मुख्यमंत्री की तपती हुई ज़िंदगी की कहानी का जीवंत दस्तावेज़ बन गया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों –
‘पुष्कर धामीः हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ (हिंदी-इंग्लिश) और
‘Pushkar Dhami: The Vibrant Heat of the Himalayas’
का लोकार्पण किया। दोनों पुस्तकों का संकलन युवा लेखिका संभावना पंत ने किया है, जबकि प्रकाशन प्रभात पब्लिकेशन और रूपा पब्लिकेशन ने किया है।

ये पुस्तकें सिर्फ किसी राजनेता की उपलब्धियों का ब्योरा नहीं, बल्कि इस सवाल का जवाब भी हैं –

“दादा के आदर्श, माता की विनम्रता और एक सैनिक पिता के अनुशासन से कैसे तैयार हुआ एक पुष्कर?”


“बेटियाँ भगवान का स्वरूप हैं, और संभावना ने अपने नाम को सार्थक किया” – राज्यपाल 🎯

लोकार्पण समारोह में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लेखिका संभावना पंत की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि –

“बेटियां भगवान का स्वरूप होती हैं। संभावना ने अपने नाम के अनुरूप काम कर दिखाया है।”

राज्यपाल ने भावनात्मक अंदाज़ में बताया कि किताब में किस तरह –

  • पहाड़ के संघर्षों से जूझता एक बालपन,

  • दादा खेम सिंह जी के आदर्शों से निर्मित होता एक युवक,

  • माता की विनम्रता और शालीनता की शिक्षा,

  • और सैनिक पिता की दृढ़ता, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन

सब मिलकर एक पुष्कर को गढ़ते हैं, जो आगे चलकर उत्तराखंड का मुख्य सेवक बनता है।


“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कुछ बनूंगा, बस इतना तय था कि कुछ करूँगा” – भावुक हुए सीएम धामी

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से अपने बचपन की गलियों, पगडंडियों और गाड़–गदेरों को याद किया।

उन्होंने अपनी मां के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि –

“मैंने जीवन में यह कभी नहीं सोचा था कि मैं कुछ बड़ा बनूंगा,
लेकिन मेरे भीतर यह जीवंत ऊष्मा हमेशा रही कि मैं समाज के लिए कुछ अच्छा करूँगा।”

सीएम धामी ने एक सैनिक की पत्नी के रूप में अपनी माता के जीवन की कठिनाइयों, पहाड़ की तंग-ढलानों, आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक सादगी को याद करते हुए नम आवाज़ में सभी का आभार जताया।
उन्होंने पुस्तक की लेखिका, प्रकाशकों और कार्यक्रम में पहुंचे सभी संतों, अतिथियों और जनप्रतिनिधियों का धन्यवाद किया।


“हिमालय जैसा नेता, जो संकट में सबसे आगे खड़ा होता है” – राज्यपाल की प्रशंसा

राज्यपाल ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने बीते वर्षों में कई ऐतिहासिक काम किए हैं।

उन्होंने बताया कि –

  • उत्तराखंड आज कई क्षेत्रों में अग्रिम पंक्ति में खड़ा है

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न के अनुरूप राज्य में नए-नए विकास कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं

  • सिलक्यारा, जोशीमठ, धराली से थराली जैसी बड़ी आपदाओं में सीएम धामी सबसे पहले प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे

राज्यपाल ने कहा कि धामी –

  • अनुशासित भी हैं

  • विनम्र भी

  • करुणामय भी

और यही गुण उन्हें एक फ्रंटलाइन लीडर के रूप में अलग पहचान देते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कई ऐतिहासिक और कड़े निर्णय लेकर यह संदेश दिया है कि व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा।


“राज्य में जो काम मोदी जी केंद्र में कर रहे हैं, वही धामी जी यहां कर रहे हैं” – स्वामी चिदानंद सरस्वती

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने संबोधन में देश और राज्य की समान धारा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि –

“देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में
भारत की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक गौरव और वंचित वर्गों का विकास जिस तरह से हो रहा है,
उसी प्रकार उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उसी सोच और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं।”

स्वामी चिदानंद ने धामी को धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों से जुड़े एक संवेदनशील जननेता के रूप में वर्णित किया।


“धामी जी निर्णय लेते हैं देश–काल की वास्तविकताओं के अनुरूप” – आचार्य प्रमोद कृष्णम

कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज ने भी मुख्यमंत्री धामी के कर्तव्यपरायणता और निर्णय क्षमता की खुलकर प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि –

“धामी जी समाज, राष्ट्र और समय की वास्तविकताओं के अनुरूप निर्णय लेते हैं।
वे परिस्थितियों से भागते नहीं, उनका सामना करते हैं।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लेखिका संभावना पंत को भी इस कार्य के लिए साधुवाद दिया और इसे एक युगीन दस्तावेज़ करार दिया, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा।


लेखिका संभावना पंत: “ये किताब केवल पद की नहीं, संघर्षों की कहानी है” ✍️

पुस्तक की संकलक और लेखिका संभावना पंत ने बेहद सधी और संवेदनशील शैली में अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि ये पुस्तक –

  • सीएम धामी के व्यक्तिगत गुणों,

  • उनके आचरण,

  • उनकी दूरदर्शी सोच,
    का प्रतिबिंब है।

संभावना ने बताया कि पुस्तक में –

  • दादाजी, पिता और माता के संघर्षों का विस्तार से उल्लेख है

  • पहाड़ की सादगी, गरीबी, संघर्ष और सामूहिकता की संस्कृति के बीच एक बच्चे के नेता बनने की यात्रा दर्ज है

  • युवा अवस्था से लेकर राज्य के मुख्य सेवक के पद तक पहुंचने की पूरी गाथा है

  • धामी की नेतृत्वशीलता, दृढ़ता, विनम्रता और कर्मठता को अलग-अलग प्रसंगों के ज़रिये रखा गया है

उन्होंने पुस्तक को समर्पित करते हुए सभी अतिथियों, संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और जनमानस का धन्यवाद किया।


कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, राजनीति और लोक का संगम 🙏

इस लोकार्पण समारोह ने यह संदेश भी दिया कि उत्तराखंड की राजनीति अभी भी अपनी जड़ों में आध्यात्मिकता और लोक-संस्कृति से गहरे जुड़ी है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे –

  • राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

  • श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज

  • स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश

  • पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड भगत सिंह कोश्यारी

  • कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी

  • राज्यसभा सांसद नरेश बंसलकल्पना सैनी

  • विधायक सविता कपूरबृजभूषण गैरोला

  • पद्मश्री बसंती बिष्ट

  • टपकेश्वर महादेव मंदिर के प्रमुख किशन गिरी जी महाराज

  • और बड़ी संख्या में वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारी व जनमानस

पूरा माहौल ऐसा था मानो उत्तराखंड अपने मुख्य सेवक की कहानी को अपने ही सामने, शब्दों में गढ़ता और सुनता हुआ महसूस कर रहा हो।