📰 सीएम धामी ने केंद्र से मांगा सीमांत विकास, ग्लेशियर सेंटर और कुंभ आयोजन में सहयोग

🌄 सीमांत गांवों की मांग अब राष्ट्रीय मुद्दा

वाराणसी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमावर्ती इलाकों की ज़रूरतों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखा। मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि सामरिक रूप से बेहद अहम सीमा क्षेत्र है, जहां बुनियादी सुविधाओं का विस्तार राष्ट्रहित में भी ज़रूरी है।

📍 उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) के ज़रिए तेज़ सड़क निर्माण, 4G नेटवर्क और भारत नेट परियोजना को सीमांत गांवों तक पहुंचाने की मांग रखी।
📡 साथ ही उपग्रह आधारित संचार सेवाओं को शुरू करने का भी आग्रह किया, जिससे आपदा या विपरीत हालातों में संपर्क बना रह सके।


❄️ “हिमालय बचाओ” की पहल: ग्लेशियर स्टडी सेंटर की माँग

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते ख़तरों को ध्यान में रखते हुए एक उच्चस्तरीय ग्लेशियर अध्ययन केंद्र की स्थापना की मांग की। साथ ही जैव विविधता को बचाने के लिए बायोडायवर्सिटी कंज़र्वेशन इंस्टिट्यूट का प्रस्ताव भी रखा।

🌿 उन्होंने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाना सिर्फ उत्तराखंड का नहीं, बल्कि पूरे देश का दायित्व है।


🎒 साहसिक पर्यटन को मिले अंतर्राष्ट्रीय पहचान

धामी ने बैठक में यह भी कहा कि उत्तराखंड में साहसिक खेलों और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों की अपार संभावनाएं हैं
इसलिए राज्य में अंतर्राष्ट्रीय साहसिक खेल प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना होनी चाहिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार भी मिलेगा और पर्यटन को नया आयाम भी।


🛕 नंदा राजजात और कुंभ के लिए केंद्र से माँगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा और 2027 के हरिद्वार कुंभ मेले को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र से तकनीकी और वित्तीय सहयोग की मांग रखी।

🚩 उन्होंने कहा कि ये आयोजन उत्तराखंड की संस्कृति और आस्था की पहचान हैं, और देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेंगे, ऐसे में तैयारियों को लेकर केंद्र की भूमिका अहम होगी।


🔍 विकास की दौड़ में आगे बढ़ता उत्तराखंड

धामी ने कहा कि प्रदेश की 80% से अधिक भूमि पहाड़ी और 71% हिस्सा जंगलों से घिरा है। फिर भी राज्य ने विकास दर में डेढ़ गुना वृद्धि हासिल की है।

🏆 नीति आयोग की SDG रैंकिंग में उत्तराखंड को पहला स्थान और वित्तीय प्रबंधन में CARE एजेंसी की रिपोर्ट में दूसरा स्थान मिला है — ये दर्शाते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य आगे बढ़ रहा है।


⚖️ सख्त कानूनों से मजबूत शासन

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में पिछले वर्षों में कई ऐतिहासिक क़दम उठाए गए हैं:

  • समान नागरिक संहिता

  • नकल विरोधी कानून

  • धर्मांतरण पर रोक

  • दंगारोधी कानून

  • संशोधित भू-कानून

इन सबने राज्य को एक समरस, सुरक्षित और संवेदनशील प्रशासनिक मॉडल बनाया है।


🧘 योग, आयुर्वेद और आत्मनिर्भरता की नई दिशा

📌 देश की पहली “योग नीति” उत्तराखंड में लागू की गई है।
📌 दो Spiritual Economic Zones बनाए जा रहे हैं — जहां आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
📌 “वोकल फॉर लोकल” के तहत 3 लाख युवाओं को स्वरोज़गार से जोड़ा गया है, जिससे आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा जा रहा है।


🇮🇳 “मजबूत भारत की नींव — संगठित राज्य”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश भीतर से अधिक सुरक्षित और संगठित हुआ है।
उन्होंने कहा,

“मध्य क्षेत्रीय परिषद जैसे मंचों के ज़रिए राज्यों के बीच समन्वय मज़बूत हो रहा है और हमारी समस्याएं सुनी जा रही हैं। यह विकसित भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।”