कोटद्वार की फिज़ाओं में इस बार सिर्फ़ चहचहाते पक्षियों की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, संरक्षण और जनभागीदारी की गूंज सुनाई दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार में दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का शुभारंभ करते हुए साफ़ संदेश दिया— विकास तभी सार्थक है, जब प्रकृति सुरक्षित रहे।
इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री ने कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लिए 326 करोड़ रुपये से अधिक की 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। हजारों की संख्या में जुटा जनसमूह इस बात का साक्षी बना कि कोटद्वार अब सिर्फ़ प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि इको-टूरिज़्म और सतत विकास का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। 🎯
🌿 दिव्यांग बच्चों से संवाद, सिद्धबली में पूजा और फिर प्रकृति उत्सव
कोटद्वार पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने सबसे पहले दिव्यांग बालक-बालिकाओं से संवाद कर उनकी शिक्षा और भविष्य की जानकारी ली। इसके बाद सिद्धबली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
सनेह क्षेत्र में आयोजित बर्ड फेस्टिवल स्थल पर पहुंचने पर गढ़वाली लोकभाषा में स्वागत गीत, स्कूली बच्चों की पक्षी संरक्षण पर प्रस्तुति और रंग-बिरंगे स्टॉल्स ने माहौल को जीवंत बना दिया।
🚧 326 करोड़ की विकास योजनाएं: कोटद्वार को नई रफ्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि—
🔹 21 योजनाओं का शिलान्यास (81.72 करोड़ रुपये)
🔹 40 योजनाओं का लोकार्पण (244.39 करोड़ रुपये)
कुल मिलाकर 326.12 करोड़ रुपये की योजनाएं जनता को समर्पित की गईं।
इनमें बस टर्मिनल, आयुष चिकित्सालय, खोह नदी के लिए एसटीपी, मालन नदी पर पुल, कोटद्वार–नजीबाबाद फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाले हैं।
👩🌾 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल्स की सराहना करते हुए कहा—
“21वां दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा और इसमें महिलाओं की भूमिका सबसे बड़ी होगी।”
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बहुराष्ट्रीय कंपनियों से बेहतर है, और यही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली ताकत है।
🐦 पक्षी संरक्षण से पर्यटन को नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में देश की 1300 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।
उन्होंने सुरख़ाब पक्षी का उदाहरण देते हुए कहा कि पक्षी केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के प्रहरी हैं।
राज्य सरकार इको-टूरिज़्म, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, ड्रोन पायलट प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है। घायल पशु-पक्षियों के इलाज के लिए कालागढ़ में विशेष व्यवस्था की गई है।
🗣️ विधानसभा अध्यक्षा का बड़ा सुझाव
विधानसभा अध्यक्षा एवं स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी भूषण ने बताया कि कोटद्वार क्षेत्र में लगभग 400 पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि—
📅 31 जनवरी को हर साल ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ के रूप में मनाया जाए, ताकि देश-विदेश के प्रकृति प्रेमी कोटद्वार से जुड़ें।
🌏 “यह उत्सव केवल आयोजन नहीं, संवेदनशीलता का संदेश है”
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने भावपूर्ण शब्दों में कहा—
“पक्षी को खुले आकाश में उड़ते देखकर हमें स्वतंत्रता का असली अर्थ समझ में आता है। स्वतंत्रता सिर्फ़ मनुष्य की नहीं, पूरी प्रकृति की है।”
उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल कोटद्वार को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर बनेगा।
👥 जनभागीदारी बनी ताकत
फेस्टिवल के पहले दिन ही 2500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए—
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🎓 300 छात्र-छात्राएं
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🧑🎓 800 युवा
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👩 400 महिलाएं
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🐦 100 बर्ड वॉचर
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👥 900 से अधिक आम नागरिक
मैराथन, पेंटिंग, क्विज़ और निबंध प्रतियोगिताओं ने बच्चों और युवाओं में उत्साह भर दिया।
✨ निष्कर्ष
कोटद्वार का यह बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल साबित करता है कि विकास और पर्यावरण विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में कोटद्वार अब विकास के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण की मिसाल बनने की राह पर है। 🕊️










