श्रद्धा, संस्कृति और संकल्प की गूंज: जागेश्वर के श्रावणी मेले से मुख्यमंत्री धामी का संदेश

 

उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था और परंपरा की सजीव तस्वीर पेश करता है जागेश्वर धाम, जहां से हर साल श्रावणी मेले की शुरुआत होती है। इस बार भी पावन अवसर पर श्रद्धा की सरिता वर्चुअल माध्यम से बह निकली, जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा— “जागेश्वर सिर्फ मंदिर नहीं, ये हमारी आत्मा का आईना है।” 🌿🙏

मुख्यमंत्री ने जागेश्वर धाम को उत्तराखंड की पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बताया और कहा कि श्रावणी मेला सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारी लोक आस्था, परंपराओं और सामाजिक एकता की अद्भुत झलक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आज भारत अपने संस्कृतिक पुनर्जागरण के अमृतकाल में है, जिसमें अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे पुनर्निर्माण कार्य आस्था के नए शिखर गढ़ रहे हैं।

🎯 जागेश्वर मास्टर प्लान के तहत ₹146 करोड़ की योजनाएं पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं। दूसरे चरण की परियोजनाएं भी तैयार हैं। साथ ही, मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों को संरक्षित और विकसित किया जा रहा है।

🚴‍♂️ पर्यटन को गति देने की दिशा में
अल्मोड़ा जिले की कोसी नदी के किनारे 40 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक, शीतलाखेत को ईको टूरिज्म हब, और द्वाराहाट-बिनसर जैसे क्षेत्रों को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

📈 विकास की रफ्तार और युवाओं को उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड देश में सतत विकास लक्ष्यों में पहले स्थान पर है। राज्य की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कम है और पिछले चार वर्षों में 24 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

🛡️ संस्कृति की रक्षा के लिए सख्त कदम
धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून, समान नागरिक संहिता, और ऑपरेशन कालनेमी जैसे ठोस निर्णय लिए हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, विधायक श्री मोहन सिंह मेहरा, मंदिर समिति के उपाध्यक्ष श्री नवीन भट्ट, जिलाधिकारी श्री आलोक कुमार पांडेय और मुख्य विकास अधिकारी श्री रामजी शरण शर्मा मौजूद रहे।