नई दिल्ली | 24 अक्टूबर 2026
भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक अहम खबर सामने आई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, यूरोप में भारतीय हथियारों और गोला-बारूद की मांग बढ़ने से भारत वहां के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल हो गया है। उन्होंने Bloomberg की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक साल में भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है।
रक्षा सचिव ने यह बात 23 अक्टूबर को आयोजित ‘अग्रसर भारत मंच 2026’ कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने बताया कि यूरोप में रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए चल रही ‘ReArm Europe’ पहल से भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग को बढ़ावा मिला है।
💰 रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का रक्षा निर्यात
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया। यह पिछले वित्त वर्ष के ₹23,622 करोड़ के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की वृद्धि है।
इस उपलब्धि में सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों की भूमिका रही। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने ₹21,071 करोड़ का निर्यात किया, जबकि निजी कंपनियों का योगदान ₹17,353 करोड़ रहा।
🇪🇺 यूरोप में क्यों बढ़ रही है भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग?
रक्षा सचिव के अनुसार, यूरोप में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने के पीछे गोला-बारूद और सैन्य आपूर्ति की जरूरतें प्रमुख कारण हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद, तोप के गोले और बड़े तथा छोटे कैलिबर के एम्युनिशन शामिल हैं।
यूरोप की ‘ReArm Europe’ पहल का उद्देश्य क्षेत्र की रक्षा क्षमताओं और सैन्य तैयारियों को मजबूत करना है। इस बढ़ती मांग से भारतीय रक्षा निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर पैदा हुए हैं।
🏭 भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र हुआ व्यापक
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार हुआ है। पहले इस क्षेत्र में कुछ बड़े सरकारी उपक्रमों की प्रमुख भूमिका थी, लेकिन अब इसमें निजी कंपनियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप की भागीदारी भी बढ़ी है।
उनके मुताबिक, भारत में लगभग 840 बड़ी और मध्यम कंपनियां तथा करीब 17,000 छोटे उद्यम और स्टार्टअप इस औद्योगिक तंत्र का हिस्सा हैं। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात करता है।
दुनिया के रक्षा बाजार में भारत की आगे की रणनीति
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत यूरोप के रक्षा खरीद कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए यूरोपीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
भारत की नीति में घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देना भी शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाले पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा देश के भीतर खर्च हो और भारतीय डिजाइन, विकास तथा विनिर्माण को प्रोत्साहन मिले।
भारत के लिए बढ़ता रक्षा निर्यात विदेशी बाजारों तक पहुंच मजबूत करने का अवसर है। हालांकि, यूरोप में तीसरे सबसे बड़े निर्यातक का दर्जा रक्षा सचिव द्वारा उद्धृत रिपोर्ट पर आधारित है; इसे स्पष्ट रूप से उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।









