देवीधुरा में फूलों और फलों की बौछार के बीच ऐतिहासिक बग्वाल, 8 मिनट तक गूंजे मां वाराही के जयकारे

चम्पावत | 28 अगस्त 2025

उत्तराखंड के चम्पावत स्थित मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के मौके पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का आयोजन हुआ। चार खाम और सात थोक के बीच हुई पारंपरिक बग्वाल में इस बार पत्थरों के बजाय फल और फूलों का इस्तेमाल किया गया।

दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई बग्वाल 1:55 बजे समाप्त हुई। करीब 8 मिनट तक चले इस अनूठे आयोजन के दौरान पूरा बग्वाल मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंजता रहा। 🙏🌸

मां वाराही के दर्शन कर CM धामी ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बग्वाल मेले में शामिल होने के लिए हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। यहां कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।

हेलीपैड पर छोलिया लोकनृत्य की प्रस्तुति भी हुई।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि व खुशहाली की कामना की। उन्होंने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए मां वाराही से सभी पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

चार खाम के बग्वालियों ने निभाई सदियों पुरानी परंपरा

पाटी विकासखंड स्थित मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चार खामों के बग्वाली मैदान में पहुंचे।

इनमें वालिक खाम (सफेद), चम्याल खाम (गुलाबी), गहड़वाल खाम (भगवा) और लमगड़िया खाम (पीला) शामिल रहे।

पारंपरिक रंग-बिरंगे कपड़ों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से बनी ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल शुरू हुई। 📢

1:48 से 1:55 बजे तक चला अनोखा आयोजन

इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे समाप्त हुई। करीब 8 मिनट तक चले इस आयोजन में फलों और फूलों का इस्तेमाल किया गया।

फल-फूलों की बौछार के बीच बग्वाल मैदान का माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण नजर आया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ और फलदायी माना जाता है।

चारों खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

CM धामी ने महिलाओं से बंधवाई राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने भी सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं। 🎗️

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की बग्वाल को उत्तराखंड की आस्था, लोकसंस्कृति और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा बताया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ राज्य की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत चल रहे कई काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं के प्रमुख धार्मिक और पौराणिक स्थलों के विकास पर काम किया जा रहा है।

देवीधुरा मंदिर परिसर में ₹4.27 करोड़ की लागत से गढ़वाल खाम भवन और ₹4.57 करोड़ की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है।

इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण पूरा हो चुका है।

धार्मिक पर्यटन के लिए करोड़ों रुपये के काम

मुख्यमंत्री के अनुसार, घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर ₹1.95 करोड़, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर ₹4.70 करोड़ और पूर्णागिरि मार्ग पर ₹5 करोड़ की स्ट्रीट लाइट परियोजना पर काम किया जा रहा है।

पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर और डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से जुड़े विकास कार्य भी जारी हैं।

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत ₹68.58 करोड़ की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की बात

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि देवीधुरा में ₹9.80 करोड़ की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण जल्द कराया जाएगा।

बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित किए जाने का भी उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे मेले की गरिमा और व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया गया है।

‘विकास भी और विरासत भी’ पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है।

उन्होंने प्रदेशवासियों, खासकर युवाओं से लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। इस दौरान उन्होंने ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।

मुख्यमंत्री ने बग्वाल की परंपरा को अनुशासन और भाईचारे से जोड़ते हुए कहा कि आयोजन के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं।