देहरादून | 24 जुलाई 2026
उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक ओर जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को प्रभावी ढंग से कम किया जाए, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव आधारित पर्यटन (Wildlife Tourism) को इस तरह विकसित किया जाए कि स्थानीय लोगों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर भी तैयार हों। 🎯
शुक्रवार को सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता, पर्यटन और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलित नीति अपनाने पर विशेष जोर दिया।
स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संपदा राज्य की बड़ी ताकत है। यदि वन्यजीव आधारित पर्यटन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बहादुरी दिखाने वाले आम नागरिकों को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान
बैठक में मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की जान बचाने के लिए साहसिक कार्य करने वाले आम नागरिकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इससे समाज में साहस और जागरूकता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
मृतक और घायलों के परिवारों को समय पर मिले मुआवजा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन्यजीव हमलों में मृतक और घायल व्यक्तियों तथा उनके परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार समय पर मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वीकृत सभी विकास परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
आधुनिक तकनीक से रोका जाएगा मानव-वन्यजीव संघर्ष
बैठक में बताया गया कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), कैमरा ट्रैप, ड्रोन, सर्प बचाव किट, सोलर लाइट और आधुनिक निगरानी प्रणाली का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।
इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत व्यवस्था, निगरानी और वन कर्मियों को आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विकास परियोजनाओं को भी मिली गति
बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जनहित परियोजनाओं पर भी विचार हुआ। आवश्यक शर्तों के साथ राजाजी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में गैस पाइपलाइन, अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में सड़क, आईटीबीपी अवसंरचना और ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी परियोजनाओं को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को अग्रसारित करने की अनुमति प्रदान की गई।
बाघ संरक्षण के लिए एआई तकनीक और आधुनिक निगरानी पर जोर
राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित पूरे राज्य में बाघ संरक्षण को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कैमरा ट्रैप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों और चारागाहों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि वन्यजीव कॉरिडोरों का संरक्षण और वनाग्नि प्रबंधन को भी और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष तैयारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरिद्वार कुंभ के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) की विशेष तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार की कमी न रहे।
टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और इको-फ्रेंडली सफारी पर भी चर्चा
बैठक में कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, पर्यावरण अनुकूल सफारी वाहनों को बढ़ावा देने, फील्ड स्टाफ को विशेष प्रोत्साहन तथा वन्यजीव अपराधों की प्रभावी जांच के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।









