देहरादून के मालसी स्थित एक होटल में बुधवार को आयोजित हिन्दुस्तान शिखर समागम–उत्तराखण्ड 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की नीतियों, कानून व्यवस्था और भविष्य की बड़ी योजनाओं पर खुलकर बात की। कार्यक्रम का माहौल गंभीर भी था और आशावान भी—जहां विकास, पहचान और व्यवस्थागत सुधार चर्चा के केंद्र में रहे।

“जनभावनाओं के अनुरूप फैसले” — धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते चार वर्षों में सरकार ने जनअपेक्षाओं के अनुरूप कई बड़े निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा 2022 से पहले किया गया था और सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में इस पर कमेटी गठित कर इसे धरातल पर उतारा गया। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहां UCC लागू हुआ।

उन्होंने नकल विरोधी कानून, दंगा रोधी कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे फैसलों को “सिस्टम में पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन” की दिशा में उठाए गए कदम बताया। धार्मिक स्थलों के नाम पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को भी कानून व्यवस्था मजबूत करने का हिस्सा बताया गया।

हरिद्वार कुंभ 2027: अभी से तैयारी

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि 2027 में हरिद्वार में भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि अब तक 10 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। केंद्र सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।

नई खनन नीति से बढ़ा राजस्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई खनन नीति के बाद राज्य की आय में बड़ा इजाफा हुआ है। पिछले दो वर्षों में हर साल 1200 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पहले यह लगभग 400 करोड़ रुपये तक सीमित था। खनन क्षेत्र में सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने लगातार दो वर्षों तक 100-100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी है।

“सबका साथ, सबका विश्वास” पर जोर

धामी ने दोहराया कि सरकार सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास और सबका प्रयास के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं, लेकिन कानून से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती जारी रहेगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास और हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर समेत कई गणमान्य उपस्थित रहे। इस मौके पर कई विशिष्ट हस्तियों को “उत्तराखंड गौरव सम्मान” से सम्मानित भी किया गया।

देहरादून की इस बैठक ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड विकास, आस्था और कानून व्यवस्था—तीनों मोर्चों पर राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना रहेगा। 🎯