देहरादून, शुक्रवार।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा है कि शिकायत का समाधान तभी माना जाएगा, जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट होगा। सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान टिहरी की श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी का मामला सामने आया। छात्रा ने विश्वविद्यालय से डिग्री न मिलने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों तक कोई निस्तारण नहीं हुआ। यह जानकर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराज़गी जताई और सचिव आईटी व सचिव उच्च शिक्षा को एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने तथा दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रा को सात दिन के भीतर डिग्री उपलब्ध कराई जाए।
सीएम धामी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हेल्प डेस्क बनाने पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों की शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाए। इसके लिए अधिकारियों को अपने नोटिस बोर्ड पर यह लिखकर चस्पा करना होगा कि वे किस दिन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि हर सप्ताह सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करें। वहीं सचिवगणों को महीने में दो बार और मुख्य सचिव को महीने में एक बार समीक्षा करनी होगी। तीन महीने से अधिक लंबित प्रकरणों को विशेष अभियान चलाकर निपटाने के आदेश दिए गए।
उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों व सुरक्षा दीवारों के काम को तुरंत पूरा करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों का समाधान समयसीमा के भीतर न करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
इस दौरान सीएम ने खुद शिकायतकर्ताओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता की आवाज़ अनसुनी न हो। बैठक में आईटीडीए निदेशक गौरव कुमार ने जानकारी दी कि सीएम हेल्पलाइन पर सबसे ज़्यादा शिकायतें पेयजल, गृह विभाग और ऊर्जा से संबंधित हैं।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम समेत विभिन्न विभागाध्यक्ष और सभी जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।










