देहरादून | 22 सितंबर 2026
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की अब समयबद्ध समीक्षा पर जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लंबित विवेचनाओं और विशेष न्यायालयों में विचाराधीन मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याचार से प्रभावित व्यक्ति को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसके अधिकार समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। 📢 राहत राशि के साथ प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास जैसी सहायता से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
लंबित मामलों की होगी प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा
मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक हुई।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक महज औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मामलों की नियमित निगरानी के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के तहत दर्ज ऐसे मामलों की समीक्षा के निर्देश दिए गए, जिनमें विवेचना लंबित है। लंबित रहने के कारणों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
लंबे समय से लंबित और गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन तथा अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों पर भी नजर
मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में विचाराधीन मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा। पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच प्रभावी तालमेल पर जोर दिया गया।
मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
राहत राशि में देरी नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए। जिन मामलों में राहत राशि देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की मदद सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए।
गंभीर और संवेदनशील मामलों में पीड़ित तथा उसके परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
मामलों की निगरानी के लिए बनेगा डिजिटल सिस्टम
मामलों की विवेचना, न्यायालय में स्थिति, राहत राशि और पीड़ितों को दी जा रही अन्य सहायता की शासन स्तर से निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर काम करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना या राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए।
वहीं, अच्छा काम करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को दूसरे जिलों के साथ साझा करने के निर्देश भी दिए गए।
पुलिस और संबंधित विभागों को प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा।
समाज कल्याण, पुलिस और अभियोजन विभाग के समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा प्रत्येक जिले में अधिनियम से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय करने को कहा गया।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता अभियान
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की जरूरत है, तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
2024 से अब तक कितने मामले दर्ज हुए?
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 अभियोग, जबकि वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए।
वर्ष 2026 में 15 सितंबर तक 116 अभियोग पंजीकृत किए गए हैं। इनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन बताए गए।
राहत राशि का आंकड़ा
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार—
- वर्ष 2024-25: 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये की सहायता।
- वर्ष 2025-26: 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये की सहायता।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक: 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता।
मुख्य सचिव तथा जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों के नियमित आयोजन की जानकारी भी बैठक में दी गई।
फैसलों की जिम्मेदारी और समय-सीमा तय करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित नहीं रहने चाहिए। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा तय की जाए तथा उसकी नियमित समीक्षा हो।
उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए अलग-अलग स्तर पर भटकना न पड़े और शासन-प्रशासन संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे—इसे सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। 🎯
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।










