✍️ जनता की पुकार पर मुख्यमंत्री धामी की सीधी सुनवाई, भरोसे का नया अध्याय

देहरादून की हवा आज कुछ अलग थी। वो सरकारी गलियारों वाली ठंडी फाइलें नहीं थीं, बल्कि जनता की तपती उम्मीदों की गर्मी मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंची थी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को एक बार फिर ये साबित किया कि जनप्रतिनिधि का असली काम केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि लोगों की आवाज़ सुनना और उस पर तुरंत कार्रवाई करना है। मुख्यमंत्री कार्यालय को मिले जनशिकायत पत्रों के आधार पर उन्होंने संबंधित फरियादियों से सीधा संवाद किया और अफसरों को फ़ौरन हल निकालने के निर्देश दे डाले।

🎯 शेरगढ़, डोईवाला से कर्मचंद की फरियाद
कर्मचंद की खेती की जमीन को सींचने वाली नहर टूट गई थी। पसीने से सींची जमीन अब पानी को तरस रही थी। जैसे ही ये बात मुख्यमंत्री तक पहुँची, उन्होंने बिना देर किए सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता को निर्देश दे डाले – “किसान की फसल सूखनी नहीं चाहिए!”

🎯 मेजर नरेश कुमार सकलानी का सवाल – ज़मीन पर कब्ज़ा क्यों?
सेना से सेवा-निवृत्त मेजर सकलानी ने जब बताया कि उनकी ज़मीन पर अतिक्रमण कर निजी लोग लघु सिंचाई नहर बना रहे हैं, तो मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिलाधिकारी देहरादून को तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।

🎯 धीरेंद्र शुक्ला की बिल्डर से जंग
कैनाल रोड निवासी धीरेंद्र शुक्ला को एक बिल्डर लगातार परेशान कर रहा था। आम नागरिक की सुरक्षा और सम्मान के लिए मुख्यमंत्री ने एमडीडीए (Mussoorie-Dehradun Development Authority) को मामले की जांच का निर्देश दिया।

🎯 दिनकर विहार की टूटी सड़क, विशन दत्त की टूटी उम्मीद नहीं
विकासनगर निवासी विशन दत्त शर्मा की सड़क से जुड़ी समस्या को भी मुख्यमंत्री ने अनसुना नहीं किया। लोक निर्माण विभाग के सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए – “जनता को रास्ता चाहिए, बहाने नहीं।”


🗣️ “जनता के पत्र सिर्फ कागज़ नहीं होते, वो विश्वास की आवाज़ हैं। हर पत्र में एक परिवार की चिंता और एक राज्य की उम्मीद छुपी होती है। समाधान ही हमारी सरकार की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान है।”

— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी


उत्तराखंड की जनता को शायद यही भरोसा चाहिए था – कि उनकी आवाज़ सिर्फ दीवारों से नहीं टकराएगी, बल्कि मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंचेगी। और जब सीएम खुद फोन उठाकर बात करें, तो भरोसे की नींव और गहरी हो जाती है।