CM धामी ने किया राज्य आंदोलन के जननायक रणजीत सिंह वर्मा पर लिखी पुस्तक का विमोचन, संघर्ष की यादें होंगी जीवंत

देहरादून | गुरुवार

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास और उसमें अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं पूर्व विधायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।

इस पुस्तक में पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन, रणजीत सिंह वर्मा के संघर्ष और राज्य निर्माण में उनके योगदान को विस्तार से संजोया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। 🇮🇳

📚 राज्य आंदोलन के संघर्ष की कहानी बयां करेगी पुस्तक

गुरुवार को देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया।

इस पुस्तक को तैयार करने में वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी और अजय वर्मा के प्रयासों की मुख्यमंत्री ने सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल रणजीत सिंह वर्मा के जीवन का परिचय नहीं है, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष, संकल्प और आंदोलनकारियों के त्याग की कहानी भी सामने लाती है। इससे नई पीढ़ी को राज्य निर्माण के इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।

आंदोलनकारियों को एकजुट करने में निभाई थी अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के पीछे दशकों का संघर्ष और हजारों आंदोलनकारियों का त्याग जुड़ा है। पृथक राज्य की स्थापना जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग और आकांक्षाओं की जीत थी।

स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने इस आंदोलन को मजबूती देने के लिए लोगों को एकजुट किया और अलग राज्य की मांग को व्यापक स्तर पर उठाया।

वे उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष रहे। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को संगठित नेतृत्व दिया।

बंद, चक्का जाम और रेल रोको आंदोलन का किया नेतृत्व

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी रणजीत सिंह वर्मा ने देहरादून में राज्य आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा।

उन्होंने बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व करते हुए पृथक उत्तराखंड की मांग को बुलंद किया।

आंदोलन के दौरान उन्होंने डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी आंदोलनकारियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाने के रूप में विकसित करने में सहयोग दिया। पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में भी उन्होंने मदद की।

9 नवंबर 2000 को बना था उत्तराखंड देश का 27वां राज्य

मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर में हुई घटनाओं को याद करते हुए कहा कि ये उत्तराखंड के इतिहास के बेहद पीड़ादायक अध्याय हैं।

कठिन परिस्थितियों, संघर्ष और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अलग राज्य की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा। इसी लंबे संघर्ष के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

दो बार विधायक रहे, लेकिन राज्य निर्माण का संकल्प रखा सर्वोपरि

स्व. रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए थे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विधायक रहने के बावजूद उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण के संकल्प को प्राथमिकता दी। राज्य बनने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे।

मुख्यमंत्री ने उनके जीवन को सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा बताया।

आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाना सरकार का संकल्प

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। उनके सपनों के अनुरूप विकसित उत्तराखंड का निर्माण करना भी हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, आत्मनिर्भरता, समग्र विकास और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा सहित राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के सपनों को पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन करते हुए सभी आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।