देहरादून | 26 जुलाई
📚 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों और साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस दौरान साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना को मजबूत बनाने में लेखकों की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी पुस्तकें भेंट कीं, जबकि मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर विचार साझा किए।
साहित्य समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार केवल समाज का प्रतिबिंब नहीं होते, बल्कि उसे सही दिशा देने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के समग्र विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार साहित्यिक वातावरण को प्रोत्साहित करने और रचनाकारों को सहयोग देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है और इस भूमि ने भारतीय साहित्य को समृद्ध करने वाले अनेक साहित्यकार दिए हैं। उन्होंने नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से पुराने, बिखरे और अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही राज्य में दो साहित्य ग्राम विकसित करने की योजना पर भी कार्य जारी है। साहित्यकारों के सम्मान के लिए वर्ष 2022 में ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ और वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किए गए हैं।
‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मिला मुख्यमंत्री का सहयोग
हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मुख्यमंत्री ने समर्थन देते हुए कार्यक्रम में मौजूद लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य” थीम पर चलाया जा रहा यह अभियान सराहनीय है। उनके अनुसार पुस्तकें ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच की आधारशिला होती हैं तथा इस तरह की पहल युवाओं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगी।
कार्यक्रम में प्रो. गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान सहित प्रदेश के अनेक वरिष्ठ साहित्यकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।











