देहरादून।
सर्वे चौक स्थित IRDT ऑडिटोरियम में शुक्रवार को जब CSC दिवस-2025 का मंच सजा, तो सिर्फ एक आयोजन नहीं, एक डिजिटल क्रांति का उत्सव देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस कार्यक्रम में पहुंचे और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के ज़रिए गांव-गांव में बदलाव लाने वाले जमीनी योद्धाओं को VLE सम्मान से नवाज़ा।
🎯 सीएम ने साफ कहा – “उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में CSC संचालक, सिर्फ सेवाएं नहीं दे रहे, वो गांव के भविष्य को गढ़ रहे हैं।”
🧠 CSC – गांव की तकनीकी आत्मनिर्भरता की रीढ़
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश की ग्राम पंचायतें डिजिटल पंचायतों में बदल रही हैं। उत्तराखंड में 13,000 से अधिक CSCs ग्रामीण क्षेत्रों में
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यूसीसी पंजीकरण,
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प्रमाण पत्र जारी करना,
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डिजिटल ट्रांजेक्शन जैसी सुविधाएं एक क्लिक में उपलब्ध करा रही हैं।
👨💻 उन्होंने कहा, “CSC सिर्फ एक केंद्र नहीं, आम लोगों के सपनों का डिजिटल पुल बन चुका है। अब गांव से लेकर हर दुकान तक डिजिटल ट्रांजेक्शन आम हो गया है।”
🚀 डिजिटल इंडिया से उत्तराखंड का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम को याद करते हुए कहा कि आज हम उस सपने को साकार होते देख रहे हैं —
“दुनिया में सबसे ज़्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं, और यह हमारे गांवों तक भी पहुंच चुका है।”
🛰️ राज्य सरकार भी तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है:
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ई-गवर्नेंस: सरकारी सेवाएं ऑनलाइन
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ई-टूरिज्म: यात्रा की ऑनलाइन बुकिंग
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AI और क्लाउड: उन्नत तकनीकों का समावेश
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वेदर डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एनालिटिक्स: कृषि और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद
🏆 सम्मान उन्हीं को जो बदलाव की नींव रखते हैं
कार्यक्रम में CSC क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को वी.एल.ई. पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा,
“यह केवल सम्मान नहीं, पूरे गांव की मेहनत को सलाम है।”
👥 कौन-कौन रहा मौजूद?
कार्यक्रम में विधायक श्री खजान दास, उमेश शर्मा ‘काऊ’, भगवान पाटिल, कृष्ण कुमार सिंह, अश्विनी कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
🗣️ मुख्यमंत्री धामी बोले:
“Digital India अब नारा नहीं, हकीकत बन चुका है। और इसकी सबसे बड़ी ताकत वो लोग हैं, जो गांव-गांव में तकनीक को ज़मीन पर उतार रहे हैं।”










