सीएम धामी का सीमांत उत्तराखंड पर बड़ा फोकस, बनबसा लैंड पोर्ट और सीमा व्यापार विकास पर हाई लेवल बैठक

नई दिल्ली/देहरादून | 27 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों को विकास की नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी समीक्षा बैठक की। नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में आयोजित इस अहम बैठक में लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जयंत सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीमा व्यापार, कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य फोकस भारत-नेपाल सीमा पर स्थित उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत बनाना रहा। खास तौर पर चम्पावत जिले के बनबसा (गुदमी) में बन रहे आधुनिक लैंड पोर्ट प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की गई।

बनबसा लैंड पोर्ट बनेगा व्यापार का नया द्वार

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन बनबसा लैंड पोर्ट परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना को एशियन हाईवे से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और सीमा पार व्यापार को नई उड़ान मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चम्पावत और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी।

धारचूला और झूलाघाट पर भी खास ध्यान

बैठक में पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्रों धारचूला और झूलाघाट को लेकर भी अहम चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन इलाकों में सीमा व्यापार, आवागमन सुविधा और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

ये दोनों क्षेत्र लंबे समय से स्थानीय व्यापार और भारत-नेपाल आवागमन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। बेहतर सुविधाओं से यहां के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास कार्य केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय जरूरतों और जनहित को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कृषि उपज और पारंपरिक वस्तुओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए, ताकि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।

इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और पलायन रोकने में मदद मिलेगी। 🎯

समयबद्ध तरीके से पूरे हों प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे सभी कार्य समयबद्ध, सुव्यवस्थित और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, ताकि स्थानीय निवासियों को जल्द लाभ मिल सके।

उत्तराखंड के सीमांत जिलों में यह पहल विकास, सुरक्षा और रोजगार—तीनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव ला सकती है।