🌈 मुख्यमंत्री आवास में गूंजी चम्पावत की खड़ी होली, CM धामी ने होल्यारों संग बांटे रंग और राग

देहरादून — मुख्यमंत्री आवास का माहौल उस समय पूरी तरह कुमाऊँमय हो गया, जब चम्पावत के दूरस्थ पर्वतीय इलाकों से आए होल्यारों ने पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को होली की शुभकामनाएं दीं। ढोलक की थाप, मंजीरे की छनक और शास्त्रीय रागों से सजी खड़ी व बैठकी होली ने राजधानी में पहाड़ की खुशबू घोल दी। 🌄

लोकधुनों में घुला अपनापन

चम्पावत से आए प्रतिनिधिमंडल ने पारंपरिक अंदाज़ में खड़ी और बैठकी होली के सुमधुर गीत प्रस्तुत किए। राग-रागिनियों की शास्त्रीयता और भक्ति भाव से सराबोर इन प्रस्तुतियों ने मुख्यमंत्री आवास को कुछ पल के लिए कुमाऊँ की गलियों में बदल दिया।

मुख्यमंत्री ने सभी होल्यारों का आत्मीय स्वागत करते हुए सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी लोकसंस्कृति, शास्त्रीय संगीत परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है।”

कुमाऊँ की पहचान है खड़ी और बैठकी होली

मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत सहित पूरे कुमाऊँ अंचल की होली अपनी विशिष्ट शैली और आध्यात्मिक भाव के कारण देशभर में अलग पहचान रखती है। यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार लोक कला, लोक संगीत और पारंपरिक उत्सवों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों और महोत्सवों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया जा रहा है। 🎯

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का माध्यम

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और मूल्यों से जोड़ते हैं। लोक उत्सव समाज में प्रेम, भाईचारे और सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर होल्यारों ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए मंगल गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने भी समस्त प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह रंगोत्सव सभी के जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और एकता का संदेश लेकर आए।

देहरादून की इस शाम ने एक बार फिर साबित किया कि जब पहाड़ की संस्कृति राजधानी में गूंजती है, तो पूरा माहौल अपनत्व और उल्लास से भर उठता है। 🌈