अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों को भारत ने आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया, चीन ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली | 11 अगस्त 2026

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। भारत ने 7 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के मानक नाम आधिकारिक भारतीय नक्शे पर दर्ज किए। इसके तीन दिन बाद चीन ने इस कदम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इसे ‘अवैध’ तथा ‘निरर्थक’ बताया।

भारत की यह प्रक्रिया अरुणाचल प्रदेश सरकार से परामर्श के बाद की गई है। चीन की आपत्ति के बावजूद भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। 🇮🇳

27 स्थानों में क्या-क्या शामिल है?

भारत ने जिन 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक मानचित्र पर मानक नामों के साथ दर्ज किया है, उनमें 21 भूमि क्षेत्र, 4 पर्वतीय दर्रे, एक झील और एक स्मारक शामिल हैं।

इन नामों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर दर्ज करने का उद्देश्य संबंधित स्थानों की पहचान को स्पष्ट और मानकीकृत करना है।

अरुणाचल सरकार से परामर्श के बाद हुई प्रक्रिया

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन स्थानों की पहचान और नामों को लेकर प्रक्रिया अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ परामर्श के बाद पूरी की गई।

भारत की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए अपने स्तर पर नए नाम जारी करता रहा है। भारत ने चीन की ऐसी कोशिशों को पहले भी खारिज किया है।

चीन ने क्यों जताई आपत्ति?

भारत द्वारा 27 स्थानों को मानक नामों के साथ आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किए जाने के बाद चीन ने 10 अगस्त 2026 को प्रतिक्रिया दी।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत के इस कदम को ‘अवैध, निरर्थक और अमान्य’ बताया। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है और इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है।

चीन ने भारत की ओर से किए गए नामकरण को स्वीकार करने से इनकार किया है। यह प्रतिक्रिया चीन के उस पुराने रुख के अनुरूप है, जिसमें वह अरुणाचल प्रदेश पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराता रहा है।

अरुणाचल प्रदेश पर भारत का रुख क्या है?

भारत लंबे समय से चीन के इस दावे को खारिज करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने पहले भी स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा किसी स्थान को काल्पनिक या मनमाने नाम देने से उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।

भारत ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने के प्रयासों पर भी पहले आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने अप्रैल 2023 में कहा था कि ऐसे प्रयासों को भारत स्पष्ट रूप से खारिज करता है।

नामों को लेकर पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं भारत-चीन

अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा दोनों देशों के बीच नया नहीं है। चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए अपने ‘मानक नाम’ जारी करता रहा है।

भारत ने हर बार ऐसे प्रयासों को अस्वीकार किया है और कहा है कि नाम बदलने से जमीन पर स्थिति या अरुणाचल प्रदेश की भारत के साथ संवैधानिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता।

सीमा विवाद के बीच नया घटनाक्रम

भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील विषय रहे हैं। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों को आधिकारिक भारतीय नक्शे पर मानक नामों के साथ दर्ज किया जाना और उसके बाद चीन की प्रतिक्रिया इस विवाद से जुड़े ताजा घटनाक्रम के तौर पर सामने आया है।

फिलहाल दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अपने-अपने क्षेत्रीय दावों को लेकर स्पष्ट रुख रखते हैं।