DRDO ने किया स्वदेशी ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण, सेना में शामिल होने का रास्ता हुआ साफ

ओडिशा | 6 नवंबर 2026

🇮🇳 भारत की रक्षा ताकत को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम उपलब्धि सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर को स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ (Pralay) का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान सभी निर्धारित उद्देश्य पूरे हुए। इस सफलता के बाद मिसाइल प्रणाली को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

🚀 सुबह 11:10 बजे हुआ मिसाइल का परीक्षण

DRDO ने 5 नवंबर 2026 को सुबह करीब 11 बजकर 10 मिनट पर प्रलय मिसाइल का उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) की ओर से तैनात विभिन्न उपकरणों ने आंकड़े जुटाए।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन उपकरणों से प्राप्त परीक्षण डेटा ने पुष्टि की कि मिसाइल ने सभी निर्धारित परीक्षण उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत किया गया था। इस दौरान DRDO के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के सदस्य भी मौजूद रहे।

हैदराबाद की DRDO लैब ने विकसित की मिसाइल

‘प्रलय’ मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया है।

इसके सिस्टम का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने किया है। कंपनी इस परियोजना में विकास एवं उत्पादन भागीदारों में से एक है।

इस तरह मिसाइल के विकास और उत्पादन में देश की रक्षा अनुसंधान संस्थाओं तथा स्वदेशी उद्योग की भूमिका रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण पर DRDO, सशस्त्र बलों और इससे जुड़े उद्योग भागीदारों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों से लैस यह मिसाइल उभरते खतरों के मुकाबले भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को और बेहतर बनाने में मदद करेगी।

रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी।

सेना में शामिल किए जाने की प्रक्रिया अब अहम चरण में

रक्षा मंत्रालय ने सफल परीक्षण के बाद कहा है कि इस प्रणाली को सशस्त्र बलों में शामिल किया जाना अब निकट है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस विज्ञप्ति में इसकी अंतिम तैनाती की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।

प्रलय का सफल परीक्षण भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है। इससे देश की रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमता को आगे बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिली है।