नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया है। 30 अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 पर हमला हुआ। इस जहाज पर 27 भारतीय नाविक सवार थे। हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, हालांकि चालक दल ने स्थिति संभाल ली।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि हमले का सामना करने वाले दोनों जहाजों पर सवार कुल 29 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं आई है।
🚢 छोटे जहाज से टैंकर पर लगाए गए विस्फोटक
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा से जुड़े तीन सूत्रों ने बताया कि एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो लिम्पेट माइंस लगा दीं।
इसके बाद हुए विस्फोट से जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और टैंकर कुछ समय के लिए काम करने में असमर्थ हो गया।
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने बताया कि घटना के बाद आग बुझा दी गई। चालक दल सुरक्षित रहा और समुद्र में किसी तरह के प्रदूषण की सूचना नहीं मिली। जहाज ने अपनी यात्रा फिर शुरू कर दी।
यह घटना ओमान के खासाब क्षेत्र से लगभग 25 नॉटिकल मील (करीब 46 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में हुई।
🇮🇳 दो तेल टैंकरों पर हमले, 29 भारतीय सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को होर्मुज जलडमरूमध्य में दो अलग-अलग तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
इनमें शामिल हैं:
- MT LOUISE 1: पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर, जिसमें 27 भारतीय नाविक मौजूद थे। इसे 30 अक्टूबर को निशाना बनाया गया।
- MT ARZANAH: लाइबेरिया के झंडे वाला VLCC तेल टैंकर, जिसमें दो भारतीय नागरिक सवार थे। इसे 29 अक्टूबर को निशाना बनाया गया।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों जहाजों पर मौजूद सभी 29 भारतीय सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित शिप मैनेजमेंट कंपनियों के संपर्क में है।
🌐 क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में यहां व्यापारिक जहाजों पर होने वाली घटनाएं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है। लगातार हो रही समुद्री घटनाओं ने जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
⚠️ हमले के पीछे कौन? अभी नहीं हुई पुष्टि
Reuters की रिपोर्ट में समुद्री सुरक्षा सूत्रों के हवाले से लिम्पेट माइंस के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है। हालांकि, इस हमले को किस देश या संगठन ने अंजाम दिया, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
हमले की जिम्मेदारी भी किसी पक्ष ने स्वीकार नहीं की है। इसलिए फिलहाल किसी देश को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
भारत सरकार के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों जहाजों पर सवार सभी 29 भारतीय सुरक्षित हैं।











