नई दिल्ली | 24 अक्टूबर 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों से बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात पर लगातार नजर रखने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने सेना की रणनीति को अगले 20 से 30 वर्षों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही, मौजूदा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी पूरी तैयारी बनाए रखने की बात कही।
राजनाथ सिंह ने यह बात 23 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक योजना और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत बताई।
आधुनिक युद्ध के लिए संयुक्त रणनीति जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में युद्ध की परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में सेना की रणनीतियों में लचीलापन होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए जा सकें।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में विभिन्न सैन्य क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध क्षमताओं का समन्वित इस्तेमाल और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल सफलता के लिए अहम है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया उल्लेख
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें नवीन सोच, बेहतर समन्वय और आधुनिक हथियारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
उन्होंने कहा कि बदलती परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप सेना की तैयारी और कार्यप्रणाली को विकसित करते रहना जरूरी है। रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की भारत की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
सेना को मिली नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन
सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी की। यह दस्तावेज बदलते युद्ध परिदृश्य और भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने की व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
सेना कमांडरों का यह सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसमें सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा परिस्थितियों, परिचालन तैयारियों, सैन्य क्षमताओं के विकास और सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में भी दर्ज हुई बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रक्षा उत्पादन के बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंचने और रक्षा निर्यात के लगभग ₹38,000 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने का उल्लेख किया।
सरकार की ओर से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयासों के बीच इन आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनाथ सिंह के संबोधन का मुख्य संदेश स्पष्ट था—भारतीय सेना को दीर्घकालिक रणनीति पर काम करने के साथ वर्तमान सुरक्षा जरूरतों और भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों, दोनों के लिए तैयार रहना होगा।









