नई दिल्ली | 14 सितंबर 2026
🌍 BRICS Summit 2026 में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन का केंद्रीय विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रहा। सम्मेलन के समापन पर जारी New Delhi Declaration में BRICS सहयोग को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और विकास-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया।
🇮🇳 भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit
भारत ने वर्ष 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में BRICS से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए और सालभर की गतिविधियों का समापन नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन के साथ हुआ।
नई दिल्ली घोषणा के मुताबिक भारत की अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और engagements आयोजित हुए। इनमें मंत्री, सांसद, सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ, कारोबारी और अन्य हितधारक शामिल रहे।
यह वर्ष BRICS के लिए इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि संगठन ने अपनी 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर आगे की वैश्विक भूमिका को लेकर भी चर्चा की।
🌎 BRICS में कौन-कौन से देश हैं?
वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इनमें शामिल हैं:
🇧🇷 ब्राजील
🇷🇺 रूस
🇮🇳 भारत
🇨🇳 चीन
🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका
🇪🇬 मिस्र
🇪🇹 इथियोपिया
🇮🇷 ईरान
🇮🇩 इंडोनेशिया
🇸🇦 सऊदी अरब
🇦🇪 संयुक्त अरब अमीरात
आधिकारिक भारतीय आंकड़ों के अनुसार ये 11 देश मिलकर दुनिया की 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक GDP का 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार का 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।
BRICS के विस्तार का एक महत्वपूर्ण चरण जनवरी 2024 में आया, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना।
🌐 ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
सदस्य देशों ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक सार्थक भागीदारी की आवश्यकता रेखांकित की। घोषणा में Global South को वैश्विक बदलाव का महत्वपूर्ण कारक बताया गया और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया।
विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की बात सामने आई। भारत और ब्राजील की वैश्विक संस्थाओं, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिक भूमिका की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया गया।
💰 BRICS में स्थानीय मुद्राओं और भुगतान व्यवस्था पर फोकस
BRICS के आर्थिक एजेंडे में सीमा-पार भुगतान और व्यापार को आसान बनाने का मुद्दा प्रमुख रहा।
सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने तथा सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने के लिए सहयोग जारी रखने पर जोर दिया।
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी BRICS देशों के बीच भुगतान प्रणालियों को जोड़ने और एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई थी।
यानी इस समय BRICS का आधिकारिक फोकस किसी नई साझा मुद्रा की घोषणा से ज्यादा स्थानीय मुद्राओं और बेहतर cross-border payment mechanisms पर है।
🏦 GIFT City में BRICS Risk Lab का प्रस्ताव
भारत की ओर से गुजरात की GIFT City International Financial Services Centre में BRICS Risk Lab की मेजबानी का प्रस्ताव रखा गया।
नई दिल्ली घोषणा के अनुसार सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव पर आगे चर्चा करने में रुचि व्यक्त की है। प्रस्तावित Risk Lab में इच्छुक सदस्य भाग ले सकेंगे और BRICS देशों की (re)insurance क्षमता बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी आगे चर्चा की जाएगी।
⚠️ यहां यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि घोषणा में इसे पहले से स्थापित संस्था नहीं बताया गया है; भारत के प्रस्ताव पर आगे बातचीत की बात कही गई है।
🤖 AI और टेक्नोलॉजी बने BRICS एजेंडे का अहम हिस्सा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकें भी इस बार BRICS के प्रमुख विषयों में रहीं।
सदस्य देशों ने विज्ञान, तकनीक और नवाचार को आर्थिक एवं सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। BRICS Science and Research Repository जैसी पहल के जरिए सदस्य देशों के बीच ज्ञान और शोध सहयोग को आगे बढ़ाने का भी उल्लेख किया गया।
घोषणा में क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग का भी स्वागत किया गया।
🌾 कृषि और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर भी सहयोग
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान कृषि क्षेत्र में भी कई सहयोगात्मक पहलों को आगे बढ़ाया गया।
BRICS Centres of Excellence on Agro-Ecology के जरिए प्राकृतिक, जैविक और regenerative farming से जुड़े शोध, ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण पर सहयोग की दिशा तय की गई।
इसके साथ BRICS Network on Digital Agriculture के जरिए AI आधारित decision-support systems, geospatial intelligence, IoT monitoring और advanced data analytics जैसे तकनीकी साधनों के कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया गया।
🏥 स्वास्थ्य क्षेत्र में Early Warning System
स्वास्थ्य सहयोग को भी BRICS के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान मिला। सदस्य देशों ने संक्रामक रोगों से जुड़े खतरों की पहचान और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर करने के लिए BRICS Integrated Early Warning System की दिशा में काम आगे बढ़ाया।
नई दिल्ली घोषणा में इस व्यवस्था से संबंधित dedicated Sub-Working Group के गठन की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया गया।
🌱 जलवायु और सतत विकास पर भी जोर
भारत की अध्यक्षता का एक प्रमुख हिस्सा Sustainability रहा। BRICS देशों ने सतत विकास, जलवायु कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली घोषणा में 2030 Agenda for Sustainable Development के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और गरीबी उन्मूलन को सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।
🌍 व्यापार और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर चिंता
BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार में बढ़ती बाधाओं और एकतरफा tariff तथा non-tariff measures को लेकर चिंता जताई।
घोषणा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) को बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने तथा उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को बेहतर तरीके से संबोधित करने की दिशा में काम करने की बात कही गई।
⚠️ वैश्विक संघर्षों और सुरक्षा पर भी चर्चा
नई दिल्ली Summit में वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी BRICS के एजेंडे में रहे। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और कूटनीतिक संवाद के महत्व को दोहराया।
नई दिल्ली घोषणा में गाजा समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों पर भी सदस्य देशों की चिंताओं को दर्ज किया गया और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
🇷🇺 पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, skill mobility और people-to-people cooperation समेत द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने भारत में पहली बार आयोजित रूस की INNOPROM India प्रदर्शनी का भी दौरा किया।
🇨🇳 2027 में चीन संभालेगा BRICS की अध्यक्षता
भारत की अध्यक्षता के बाद अब BRICS की अगली अध्यक्षता चीन को मिलेगी। नई दिल्ली घोषणा में चीन को 2027 की अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन दिया गया है और अगले, यानी 19वें BRICS Summit की मेजबानी चीन में होने की पुष्टि की गई है।
🇮🇳 भारत की अध्यक्षता का बड़ा संदेश
BRICS 2026 का नई दिल्ली Summit ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, व्यापार और भू-राजनीति तेजी से बदल रहे हैं। भारत ने अपनी अध्यक्षता में BRICS के एजेंडे को Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability के चार व्यापक आधारों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ाया।
भारत की अध्यक्षता में हुए 400 से अधिक engagements और नई दिल्ली घोषणा से यह साफ हुआ कि BRICS का एजेंडा अब केवल पारंपरिक आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। व्यापार, वित्त, AI, कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक, जलवायु और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को संस्थागत रूप देने की कोशिश की जा रही है।
भारत के लिए यह Summit इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि नई दिल्ली ने ग्लोबल साउथ की अधिक प्रभावी भागीदारी, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और व्यावहारिक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों को BRICS के मंच से मजबूती से आगे रखा।










