हिमालय दिवस पर CM धामी की बड़ी घोषणा, हर साल मिलेगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’; हिमालय परिषद के लिए ₹1 करोड़

देहरादून | 7 सितंबर 2026

🏔️ हिमालय दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार के लिए ₹1 करोड़ देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने साथ ही हिमालय संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों के लिए ‘हिमालय विभूति सम्मान’ शुरू करने का ऐलान किया। यह सम्मान हर वर्ष हिमालय दिवस पर प्रदान किया जाएगा।

🏔️ हर साल मिलेगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय के संरक्षण और सतत विकास के लिए काम करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।

इसी उद्देश्य से ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा, जो प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर दिया जाएगा।

💰 हिमालय परिषद के लिए ₹1 करोड़ की घोषणा

‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण के प्रयासों में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान को जोड़कर टिकाऊ समाधान तलाशना जरूरी है।

🌿 इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं की आवश्यकता है, लेकिन विकास का मॉडल राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार ऐसा विकास जरूरी है जिसमें सड़क निर्माण के साथ जंगलों का संरक्षण हो, रोजगार बढ़े लेकिन नदियां भी निर्मल रहें और पर्यटन के विस्तार के साथ पहाड़ों की धारण क्षमता का ध्यान रखा जाए।

🌍 जलवायु परिवर्तन और हिमालय की बढ़ती चुनौतियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इसका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।

उन्होंने ग्लेशियरों पर बढ़ते दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों के सामने खड़े संकट के साथ अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि हिमालय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन जरूरी है।

💧 हिमालय संरक्षण का असर करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमा के आधार पर अपना प्रभाव नहीं डालता। हिमालयी क्षेत्रों का पर्यावरणीय नुकसान नदियों, कृषि, पेयजल और करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण को केवल पर्यावरण का विषय मानने के बजाय इसे भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में देखना होगा। हिमालयी राज्यों की चिंताओं और उनकी आवाज को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर मजबूती से रखने की जरूरत भी उन्होंने बताई।

👥 नई पीढ़ी को स्वच्छ हवा-पानी का जवाब देना होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी को लेकर गंभीरता से सोच रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां केवल बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों का हिसाब नहीं मांगेंगी, बल्कि यह भी पूछेंगी कि उनके लिए स्वच्छ हवा, पानी, नदियां और जंगल कितने सुरक्षित छोड़े गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यह तय करना जरूरी है कि आने वाली पीढ़ियों को कैसा उत्तराखण्ड सौंपा जाए।

♻️ ‘मिशन लाइफ’ से लेकर ‘नमामि गंगे’ तक का जिक्र

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘मिशन लाइफ’ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है। इसके लिए लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव जरूरी है।

उन्होंने पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों को अपनाने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

मुख्यमंत्री ने ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का भी उल्लेख किया और कहा कि इनके माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण एवं सतत विकास को गति दी जा रही है।

🏡 हिमालय संरक्षण से पहाड़ की समृद्धि जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण को पहाड़ की आर्थिक समृद्धि से जोड़ना होगा। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, मातृशक्ति के आर्थिक सशक्तिकरण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने से पलायन कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि हिमालय का संरक्षण और पहाड़ की समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

उनके अनुसार जंगल, बुग्याल, जैव विविधता, नदियां, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पाद उत्तराखण्ड की इकोलॉजिकल वेल्थ हैं, जिन्हें भविष्य की इकोनॉमिक स्ट्रेंथ में बदला जा सकता है।

📅 2 सितंबर से 9 सितंबर तक ‘हिमालय दिवस सप्ताह’

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमालय संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है।

उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी से जुड़े आंदोलन का रूप लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बुग्यालों को जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार, जंगलों को हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक तथा नदियों को सभ्यता की जीवनधारा बताया।

🔬 पांच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पोस्टरों का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े पांच पोस्टरों का विमोचन भी किया।

इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं।

इसके अलावा विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया गया।

👤 कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. राजेश उपाध्याय, यू-कॉस्ट के संयुक्त निदेशक डी.पी. उनियाल समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।