देहरादून | अगस्त 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि वन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है। वे देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण के ‘प्रहरी’ हैं। 🌳
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की गति बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन कायम करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने युवा वन अधिकारियों से आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशीलता के साथ काम करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम
देहरादून में आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लौंगजाम समेत भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और परिवीक्षार्थी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति का उत्तराखंड की धरती पर स्वागत करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन को सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना से जुड़ा प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन शुरू कर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा है।
उत्तराखंड का करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित
मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का करीब 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां के पर्वत, नदियां, वन और जैव विविधता राज्य की विशिष्ट पहचान हैं।
धामी ने कहा कि जंगलों का संरक्षण सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।
‘प्रकृति के प्रहरी’ बनकर काम करें वन अधिकारी
जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने परिवीक्षार्थियों से आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता का इस्तेमाल करते हुए वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं। इसलिए अधिकारों के साथ जिम्मेदारी और ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी महत्व देना जरूरी है। 🌿
13 हजार एकड़ वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा
मुख्यमंत्री ने राज्य में पर्यावरण और वन संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के तहत करीब 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसे जल्द ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तार दिया जाएगा।
विकास परियोजनाओं में पर्यावरण का संतुलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाओं की वजह से पर्यावरण को नुकसान न हो।
उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए करीब 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने इसे आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बताया।
वन उपज के परिवहन के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम
धामी ने बताया कि वन उपज के परिवहन को आसान बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।
इसके अलावा वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था और पिरुल एकत्रीकरण के जरिए ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी फोकस
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए राज्य में बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी।
उन्होंने कहा कि वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ में संतुलन सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा संतुलन बनाना है जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें और वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका एवं समृद्धि भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने युवा भारतीय वन सेवा अधिकारियों से इसी संतुलित सोच को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 🇮🇳









