नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में फिलहाल जमीन के मालिकाना हक का फैसला नहीं, बल्कि कौन सा मुकदमा मुख्य वाद के रूप में आगे बढ़ेगा, यह सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है। इसी मुद्दे पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने संकेत दिया है कि मामला दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि हाईकोर्ट ने संबंधित सभी वादियों को सुनने का मौका दिए बिना एक मुकदमे को प्रतिनिधि वाद के तौर पर आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाया। ⚖️
असल विवाद ‘किसकी ओर से मुकदमा चले’ पर
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े मामलों में अलग-अलग हिंदू पक्षकार अदालत पहुंचे हैं। ऐसे में अदालत के सामने एक व्यावहारिक कानूनी सवाल है—इनमें से किस वाद को ‘लीड केस’ या प्रतिनिधि मुकदमा माना जाए?
सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई इसी प्रक्रियात्मक सवाल पर केंद्रित है। अदालत ने फिलहाल विवादित स्थल के स्वामित्व या कब्जे पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि इस मुद्दे को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने पर विचार किया जा रहा है।
अदालत के अनुसार, हाईकोर्ट ने उस समय सभी वादियों को यह बताकर नोटिस नहीं दिया था कि किस मुकदमे को प्रतिनिधि या मुख्य वाद के रूप में अपनाने पर विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट इसी पहलू को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजने के पक्ष में दिखाई दिया।
2 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 2 सितंबर 2026 तक टाल दी है।
इस दौरान जुड़े पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए और समय मिला है। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि ‘लीड केस’ से संबंधित मुद्दा औपचारिक रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट को वापस भेजा जाता है या नहीं। 📢
18 मुकदमों से जुड़ा है विवाद
मौजूदा कानूनी प्रक्रिया में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जा चुके हैं। इनमें से 15 मामलों को एक साथ जोड़ा गया है, जबकि बाकी मामले अलग सूचीबद्ध हैं।
इसी बहु-मुकदमा स्थिति के बीच यह तय करना महत्वपूर्ण हो गया है कि किस वाद को मुख्य या प्रतिनिधि मुकदमे के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
जुलाई 2025 के आदेश पर भी टिकी नजर
इस विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को एक मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों का प्रतिनिधि मानते हुए उसके वाद को मुख्य मामले के तौर पर आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।
इसी व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती आई है। शीर्ष अदालत की मौजूदा सुनवाई में यह देखा जा रहा है कि संबंधित सभी पक्षों को उचित अवसर दिए बिना ऐसी प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी या नहीं।
हिंदू पक्ष की ओर से भी मामला लौटाने का आग्रह
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी इस मुद्दे को नए सिरे से देखने के लिए मामला हाईकोर्ट भेजे जाने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती उस व्यवस्था से जुड़ी है, जिसके तहत एक अलग मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था।
अभी क्या तय नहीं हुआ?
इस मामले को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि कौन सा हिंदू पक्ष अंतिम रूप से मुख्य पक्षकार होगा। इसी तरह मौजूदा सुनवाई में विवादित स्थल के स्वामित्व, कब्जे या अंतिम धार्मिक दावे का भी निर्णय नहीं हुआ है।
फिलहाल अदालत के सामने मुख्य मुद्दा ‘लीड केस’ और प्रतिनिधि वाद की प्रक्रिया है। 🇮🇳









