देहरादून | 2 अगस्त
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक पात्र नागरिक तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत है और इसी विश्वास के आधार पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। 📢
लाभार्थी सम्मेलन में सुने लोगों के अनुभव
देहरादून में अल्पसंख्यक मोर्चा महानगर द्वारा आयोजित ‘लाभार्थी सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से मिले लाभ, आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उनका लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचे।
विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसी कार्यप्रणाली विकसित हुई है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार सभी नागरिकों तक बिना किसी भेदभाव के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मदरसा बोर्ड की जगह बनेगा राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धी शिक्षा के क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें। उनके अनुसार शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है।
UCC पर भी रखा सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री के अनुसार समान नागरिक संहिता सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को मजबूत करने के साथ सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है।
आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने, गरीब परिवारों के उत्थान, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आवास, पेयजल, सड़क, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना भी है।
योजनाओं की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील
मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से आग्रह किया कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी अन्य पात्र लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सुझावों और अनुभवों के आधार पर योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर रही है।
लाभार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव
सम्मेलन में मौजूद लाभार्थियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं सहित विभिन्न राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं से मिले लाभ का उल्लेख किया। कई लाभार्थियों ने बताया कि इन योजनाओं से उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आर्थिक सुरक्षा के नए अवसर मिले हैं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक विनोद चमोली, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं दायित्वधारी दिनेश अग्रवाल, देहरादून नगर निगम के महापौर सौरभ थपलियाल, अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









