🚧 उत्तराखंड को सड़क विकास की बड़ी सौगात: ₹7,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर बनी सहमति, सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन को मिलेगा नया बल

नई दिल्ली/देहरादून | 1 जुलाई 2026

🎯 उत्तराखंड की सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में राज्य की सड़क और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई अहम परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई और करीब ₹7,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर सकारात्मक सहमति बनी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमावर्ती इलाकों की सामरिक जरूरतें, तीर्थाटन, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को देखते हुए राज्य में आधुनिक और मजबूत सड़क नेटवर्क का विस्तार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से लंबे समय से लंबित परियोजनाओं पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।

🚗 CRIF और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मिली बड़ी मंजूरी

बैठक में केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹750 करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृति देने पर सहमति बनी।

इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग (NHO) के अंतर्गत लगभग ₹2,966 करोड़ की लागत वाली पांच प्रमुख परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली। इनमें प्रमुख रूप से—

  • श्रीनगर बाईपास का PMC
  • पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग का फोरलेन विस्तार
  • लोहाघाट और पिथौरागढ़ बाईपास की एलाइनमेंट
  • मझोला से खटीमा के आबादी क्षेत्र में चार लेन विस्तार
  • रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की ₹530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि भी जल्द जारी करने का अनुरोध किया।

🛕 अर्धकुंभ 2027 से पहले हरिद्वार और कोटद्वार बाईपास पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने अर्धकुंभ मेला 2027 को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी तथा शहर में यातायात का दबाव भी कम होगा।

इसके अलावा कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में तेजी लाने का भी आग्रह किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से राहत मिल सके। दोनों प्रस्तावों पर केंद्र की ओर से सकारात्मक सहमति दी गई।

🌄 सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन के लिए नई संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों को Spur मार्गों के माध्यम से अन्य सड़कों से जोड़ने वाली लगभग ₹3,000 करोड़ की परियोजनाओं को भी सैद्धांतिक मंजूरी देने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक सहमति जताई।

इसके अलावा अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से NH-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण की लगभग ₹300 करोड़ की परियोजना पर भी चर्चा हुई और सैद्धांतिक सहमति बनी।

इन परियोजनाओं से पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।

🌧️ भूस्खलन प्रबंधन को भी मिलेगी मजबूती

बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक समाधान तैयार करने हेतु MoU करने का प्रस्ताव रखा, जिसे मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान कर दी।

इसके अलावा सीमा सड़क संगठन (BRO) से जुड़े लंबित मामलों, विशेषकर ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी खंड की डीपीआर और जोशीमठ बाईपास के संशोधित प्रस्तावों को भी शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया गया।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि अत्यंत कम दरों पर मिलने वाली निविदाओं में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की मौजूदा व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण और स्लोप ट्रीटमेंट कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरे हो सकें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद उत्तराखंड की सड़क संपर्क व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में सुधार और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।