नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का शुभारंभ, सीएम धामी बोले – यह दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय

हौसलों की जीत का मंच: नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का मुख्यमंत्री धामी ने किया शुभारंभ

रुड़की | 17 जनवरी 2026

भारत का खेल परिदृश्य आज जिस आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने खड़ा है, वह किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि बीते एक दशक की निरंतर साधना का परिणाम है। इसी भावना को शब्द देते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया।

रुड़की स्थित कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीता एक दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। आज भारत केवल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाला देश नहीं, बल्कि जीतने के इरादे से मैदान में उतरने वाला “नया भारत” बन चुका है 🎯।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रतियोगिता सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि भारत की अदम्य इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का उत्सव है। पावरलिफ्टिंग जैसे खेल अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। यह खेल शरीर की ताकत से कहीं आगे जाकर हौसलों की ऊंचाई को दर्शाता है।

दिव्यांग खिलाड़ी: सीमाओं को तोड़ती प्रेरणाएं

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज भारत के दिव्यांग खिलाड़ी हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने पैरालंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया था।
सत्येंद्र सिंह लोहिया ने 12 घंटे में इंग्लिश चैनल तैरकर पार कर इतिहास रचा।
बिना दोनों हाथों के शीतल देवी ने विश्व पैरा तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया कि कमजोरी भी ताकत बन सकती है।
कोलंबो में टी-20 ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट वर्ल्ड कप-2025 जीतकर भारतीय दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम ने देश का मान बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि टोक्यो पैरालंपिक में अवनी लेखरा और सुमित अंतिल के स्वर्ण पदकों से लेकर पेरिस पैरालंपिक 2024 में 29 पदकों की ऐतिहासिक उपलब्धि और एशियन यूथ पैरा गेम्स 2025 (दुबई) में 110 पदकों तक का सफर, भारत की खेल शक्ति को दुनिया के सामने साबित करता है।

दीपा मलिक: साहस की जीवंत मिसाल

मुख्यमंत्री ने समारोह में उपस्थित पद्मश्री दीपा मलिक का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आप भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता हैं, जिन्होंने रियो पैरालंपिक 2016 में रजत पदक जीता। एक सफल खिलाड़ी होने के साथ-साथ बाइकर, तैराक और रैली ड्राइवर के रूप में आपका जीवन हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत है 🌟।

खेलों में बदलाव की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट सोच और दूरदर्शी नीतियां हैं। उनके नेतृत्व में देश का खेल बजट तीन गुना बढ़ा है।
“खेलो इंडिया” अभियान ने देश के कोने-कोने से प्रतिभाओं को मंच दिया है और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती प्रदान की है।

उत्तराखंड: देवभूमि से खेलभूमि की ओर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने राज्य को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी पहचान दिलाई।
राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर 7वां स्थान प्राप्त किया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल ढांचा विकसित कर रही है, जिसका परिणाम है कि आज उत्तराखंड राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने में भी सक्षम हो चुका है।

माता-पिता को किया नमन

मुख्यमंत्री ने दिव्यांग खिलाड़ियों के माता-पिताओं की सराहना करते हुए कहा कि आपने कभी अपने बच्चों को कमजोर नहीं समझा, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाया। आज ये खिलाड़ी पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार हर स्तर पर दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ खड़ी है।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. दीपा मलिक, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरपर्सन जेपी सिंह, उपाध्यक्ष शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन सहित कई गणमान्य अतिथि और खिलाड़ी उपस्थित रहे।