अयोध्या / नई दिल्ली।
मार्गशीर्ष मास की शुभ पंचमी, विवाह पंचमी का पावन मुहूर्त, गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस की तपस्या-गूंज
और अयोध्या की धरा पर लहराती भगवा धर्म ध्वजा… मंगलवार का दिन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत
की आत्मा, उसकी सभ्यता और उसके आत्मविश्वास के पुनर्जागरण की ऐतिहासिक घड़ी बन गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दिव्य शिखर पर भगवा धर्म ध्वज फहराया और पूरे
देश-विश्व को संदेश दिया –
“आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है।”
उनके शब्दों में, सदियों की पीड़ा, संघर्ष और तपस्या के बाद यह ध्वजा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज बनकर आकाश में लहरा रही है।
“500 वर्षों के यज्ञ की परिणति” – सदियों के घाव भरने का क्षण
प्रधानमंत्री ने भावुक लेकिन संयत शब्दों में कहा कि यह अवसर उन सदियों पुराने घावों के भरने का है, जिन्हें पीढ़ियों
ने महसूस किया, जिनकी पीड़ा विरासत की तरह आगे बढ़ती रही।
उन्होंने कहा कि
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सदियों का दर्द अब शांत हो रहा है
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सदियों का संघर्ष अब सिद्धि में बदल रहा है
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सदियों से जलता आस्था का यज्ञ आज पूर्णता की ओर है
भगवान श्री राम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा और श्री राम परिवार की दिव्य महिमा आज इस धर्म ध्वजा के रूप में प्रतिष्ठित होकर, पूरे मंदिर परिसर को एक अधिभौतिक आध्यात्मिक चेतना से भर रही है।
धर्म ध्वजा: रंग में केसरिया, भाव में पुनर्जागरण 🚩
प्रधानमंत्री मोदी ने धर्म ध्वजा के हर प्रतीक की गहराई समझाते हुए कहा –
“यह धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं, भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।”
इस दस फुट ऊंचे और बीस फुट लंबे समकोण ध्वज पर–
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केसरिया रंग तप, त्याग और तेज का प्रतीक है
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दीप्तिमान सूर्य श्रीराम के पराक्रम और प्रकाश का प्रतीक है
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‘ॐ’ का पावन चिह्न सनातन सत्य और ब्रह्म के स्वरूप का संकेत है
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कोविदार वृक्ष की छवि हमारी जड़ों, हमारी स्मृति और हमारी पहचान की वापसी का प्रतीक है
उन्होंने कहा, यह ध्वज –
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संकल्प भी है और सिद्धि भी
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संघर्ष से सृजन की कहानी भी है
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संतों की तपस्या और समाज की सहभागिता का साकार रूप भी है
यह ध्वज आने वाली सदियों और सहस्राब्दियों तक दुनिया को याद दिलाता रहेगा कि विजय हमेशा सत्य की ही होती है, असत्य की नहीं।
“अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं”
पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या सिर्फ भूगोल नहीं, आचरण की पाठशाला है।
यहीं से –
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युवराज राम वनवासी राम बने
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और फिर लौटकर मर्यादा पुरुषोत्तम बने
उन्होंने बताया कि श्रीराम के इस रूपांतरण में –
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महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान
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महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा
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महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन
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निषादराज की मित्रता
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माता शबरी का प्रेम
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और भक्त हनुमान की अद्वितीय भक्ति
सबने मिलकर अहम भूमिका निभाई।
राम मंदिर परिसर में बनाए गए सप्त मंदिरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां –
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माता शबरी का मंदिर आदिवासी प्रेम और आतिथ्य का प्रतीक है
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निषादराज का मंदिर समानता और सच्ची मित्रता का प्रतीक है
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माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य और संत तुलसीदास की उपस्थिति, रामकथा को
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जीवंत रूप में सामने लाती है
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जटायु और गिलहरी की मूर्तियाँ बताती हैं कि महान संकल्पों में छोटे योगदान भी अमूल्य होते हैं
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जब भी वे रामलला के दर्शन को आएं, इन सप्त मंदिरों के दर्शन अवश्य करें क्योंकि
यहीं से मैत्री, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव का संदेश मिलता है।
“हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं” – समावेश की राम दृष्टि
प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा –
“हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं।”
राम के लिए –
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व्यक्ति की भक्ति वंश से बड़ी है
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संस्कार वंश से अधिक प्रिय हैं
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सहयोग केवल शक्ति नहीं, समर्पण का मानदंड है
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार की नीतियों में –
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महिलाओं
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दलितों
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पिछड़ों
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आदिवासियों
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किसानों, मजदूरों
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और युवाओं
को विकास के केंद्र में रखा गया है।
उनके अनुसार, जब हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर व्यक्ति सशक्त होगा, तभी 2047 तक विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा।
“राम सिर्फ व्यक्ति नहीं, राम एक मूल्य, मर्यादा और दिशा हैं”
प्रधानमंत्री ने राम के स्वरूप को केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र की संहिता के रूप में
व्याख्यायित किया।
उन्होंने कहा –
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राम आदर्श हैं
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राम मर्यादा हैं
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राम जीवन का सर्वोच्च चरित्र हैं
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राम सत्य और वीरता का संगम हैं
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राम धर्ममार्ग के साक्षात स्वरूप हैं
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राम धैर्य, क्षमा, संयम और करुणा के सागर हैं
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राम कृतज्ञता, विनम्रता और उत्तम संगति के प्रहरी हैं
और फिर बड़ी स्पष्टता से बोले –
“अगर भारत को 2047 तक विकसित बनाना है, तो हमें अपने भीतर ‘राम’ को जगाना होगा।”
विरासत पर गर्व, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति
पीएम मोदी ने कहा कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो दो बातें अनिवार्य हैं –
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अपनी विरासत पर गर्व
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गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति
उन्होंने 1835 में मैकाले द्वारा बोए गए मानसिक गुलामी के बीज का उल्लेख करते हुए कहा कि 2035 में इस घटना के 200 वर्ष पूरे होंगे और आने वाला अगला दशक भारत को इस मानसिकता से मुक्त करने के लिए समर्पित होना चाहिए।
उन्होंने कहा –
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आज भी कई जगह विदेशी को श्रेष्ठ और अपना सबकुछ संदिग्ध मानने की प्रवृत्ति दिखाई देती है
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लोकतंत्र को भी बाहरी आयातित विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया
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जबकि सच यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी है, लोकतंत्र हमारे डीएनए में है
उन्होंने उत्तिरामेरुर के हज़ार साल पुराने शिलालेख और अनुभव मंडप जैसी परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनभागीदारी, विमर्श और सहमति हमारी सभ्यता की मूल आत्मा रही है।
इसी क्रम में उन्होंने भारतीय नौसेना के ध्वज से गुलामी के प्रतीकों को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज की
विरासत स्थापित करने को मानसिकता परिवर्तन का प्रतीक बताया।
“रामत्व को नकारने वाली मानसिकता अब पीछे हट रही है”
प्रधानमंत्री ने दुःख जताया कि एक समय ऐसा भी था जब –
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ओरछा के राजा राम से
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रामेश्वरम के भक्त राम तक
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शबरी के प्रभु राम से
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मिथिला के पहुना राम तक
हर घर-घर, कण-कण में बसे राम को भी काल्पनिक साबित करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि अगर आने वाले दस वर्षों में हम गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने का संकल्प ले लें, तो
2047 तक विकसित भारत के सपने को कोई नहीं रोक सकता।
अयोध्या: परंपरा और आधुनिकता का संगम, आध्यात्मिकता और AI का संतुलन
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में अयोध्या –
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परंपरा और आधुनिकता
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सरयू की पावन धारा और विकास की नई धारा
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आध्यात्मिकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
के बीच संतुलन का प्रतीक बनेगी।
उन्होंने बताया –
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राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ नई अयोध्या का मार्गदर्शन कर रहे हैं
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भव्य हवाई अड्डा और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन
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वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस से कनेक्टिविटी
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प्राण प्रतिष्ठा के बाद लगभग 45 करोड़ श्रद्धालु दर्शन को आ चुके हैं
इससे अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एक समय विकास मानकों पर पिछड़ा माना जाने वाला यह शहर अब उत्तर प्रदेश के अग्रणी शहरों में शुमार हो रहा है।
विकसित भारत के रथ की रूपक कथा – वीरता, धैर्य, सत्य और करुणा का संगम
भगवान राम की रावण पर विजय का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए आवश्यक ‘रथ’
का सूत्र दिया –
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रथ के पहिए – वीरता और धैर्य
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रथ का ध्वज – सत्य और सर्वोच्च आचरण
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रथ के घोड़े – शक्ति, बुद्धि, अनुशासन और परोपकार
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रथ की लगाम – क्षमा, करुणा और समता
उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा को गति तभी मिलेगी,
जब राष्ट्रहित हर व्यक्ति के निजी स्वार्थ से ऊपर स्थापित होगा।
स्थापत्य और शिल्प में रची-बसी रामकथा
राम मंदिर परिसर केवल आस्था नहीं, चित्रित इतिहास और जीवंत शिक्षालय भी है –
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उत्तर भारतीय नागर शैली का दिव्य शिखर, जिस पर भगवा धर्म ध्वज फहराया गया
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चारों ओर 800 मीटर लंबा परकोटा, जो दक्षिण भारतीय स्थापत्य परंपरा की सुंदर झलक देता है
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मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण से जुड़े 87 पत्थर के दृश्य
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परिसर की दीवारों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े 79 कांस्य-पट प्रसंग
इन सबके माध्यम से हर आगंतुक को सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि राम के जीवन और भारत की सांस्कृतिक
विरासत की गहरी समझ भी प्राप्त होती है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख
डॉ. मोहन भागवत सहित अनेक संत, गणमान्य और लाखों रामभक्त मौजूद रहे।










