वीबी-जी राम जी अधिनियम से बदलेगी गांवों की तस्वीर, रोजगार और विकास को नई गारंटी: सीएम धामी

देवभूमि उत्तराखंड के गाँवों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वीबी-जी राम जी अधिनियम (Vikasit Bharat – Guarantee for Employment & Livelihood Mission, Rural) को ग्रामीण भारत के भविष्य का ब्लूप्रिंट करार दिया है।

मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा—
“यह सिर्फ मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की जड़ों तक जाकर की गई संरचनात्मक सुधार प्रक्रिया है।” 🎯

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को स्थायी रोजगार, महिलाओं को सम्मान और गांवों को विकास की नई दिशा देगा। विकसित गांवों के जरिए ही विकसित भारत की मजबूत नींव रखी जा सकती है, और वीबी-जी राम जी उसी सोच का परिणाम है।

🏡 125 दिन का रोजगार, अधिकार के साथ

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिन के रोजगार का कानूनी अधिकार मिलेगा, जो पहले से 25% अधिक है। यदि 15 दिन के भीतर काम नहीं मिला, तो बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य होगा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी तय होंगे। भुगतान साप्ताहिक होगा और देरी होने पर मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है।

💻 तकनीक से पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर सीधा वार

वीबी-जी राम जी को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित और पारदर्शी बनाया गया है—
बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग, GIS मैपिंग, मोबाइल ऐप, सार्वजनिक डैशबोर्ड, AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और साल में दो बार सोशल ऑडिट। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सब मिलकर योजना को भ्रष्टाचार-मुक्त रोजगार गारंटी मॉडल बनाता है।

🌾 किसान हित सर्वोपरि

खेती के बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिन तक योजना के कार्य रोके जा सकेंगे, ताकि किसानों को मजदूरों की कमी न हो और खेती की लागत न बढ़े। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संतुलन भी बना रहेगा।

🗳️ असली ताकत ग्राम सभा के हाथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अधिनियम में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को निर्णायक अधिकार दिए गए हैं। विकास कार्य ऊपर से थोपे नहीं जाएंगे, बल्कि ग्राम सभा खुद तय करेगी। कम से कम 50% काम सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर होंगे—चाहे जॉब कार्ड हों, पंजीकरण हो या योजना निर्माण।

🛠️ काम भी मिलेगा, गांव भी संवरेंगे

योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियां और आपदा प्रबंधन से जुड़े काम किए जाएंगे—
तालाब, चेकडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, SHG शेड, स्किल सेंटर, ग्रामीण हाट, रिटेनिंग वॉल और ड्रेनेज जैसे कार्यों से गांवों की तस्वीर बदलेगी।

👩‍🌾 महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए स्किल सेंटर, शेड और ग्रामीण हाट बनाए जाएंगे, ताकि बहनों को गांव में ही रोजगार और सम्मान मिल सके।

🏗️ मजबूत प्रशासनिक ढांचा

ग्राम रोजगार सहायक, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायकों के प्रशिक्षण व निगरानी के लिए प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है, जिससे काम की गुणवत्ता और समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।

💰 उत्तराखंड को 90% केंद्र सहायता

हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड को इस योजना में 90:10 के अनुपात में केंद्र सरकार की वित्तीय मदद मिलेगी। इससे राज्य पर बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रामीण विकास तेज़ी से होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि SBI के विश्लेषण के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को करीब ₹17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा। यह योजना गरीबों के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीबी की जड़ पर सीधा प्रहार है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट और विधायक श्री दलीप रावत भी उपस्थित रहे।