🌄 लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग: जब संस्कृति, विकास और संकल्प एक मंच पर दिखे
मुख्यमंत्री धामी बोले—देवभूमि की अस्मिता से समझौता नहीं, उत्तराखंड संभावनाओं से उपलब्धियों की ओर 🎯
लखनऊ | उत्तरायणी कौथिग | विशेष रिपोर्ट
उत्तराखंड की खुशबू, पहाड़ों की संस्कृति और विकास का आत्मविश्वास—तीनों का संगम उस वक्त देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में शामिल हुए। मंच से उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड आज केवल संभावनाओं का राज्य नहीं, बल्कि उपलब्धियों की नई मिसाल बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने उत्तरायणी, मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तरायणी सिर्फ एक लोकपर्व नहीं, बल्कि देवभूमि की आत्मा, पहचान और जड़ों से जुड़ाव का उत्सव है। उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे उत्तराखंडवासियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने इसे भावनात्मक मिलन का पर्व बताया।
🧵 ‘वोकल फॉर लोकल’ की जीवंत तस्वीर बना उत्तरायणी कौथिग
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त मंच है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की झलक न केवल परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत देती है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के विज़न का जीवंत उदाहरण है, जहां विविधताओं में एकता साफ दिखाई देती है।
🏔️ 25 वर्षों की साधना, संस्कृति और सेवा का प्रतीक—पर्वतीय महापरिषद
मुख्यमंत्री धामी ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में रह रहे हजारों उत्तराखंडवासियों को एक सूत्र में बांधकर उनकी भाषा, बोली और परंपराओं को जीवित रखना आसान काम नहीं था।
रजत जयंती वर्ष में प्रवेश करना संस्था के समर्पण और तपस्या का प्रमाण है।
💭 “लखनऊ मेरी कर्मभूमि है”—मुख्यमंत्री का भावुक संबोधन
मुख्यमंत्री ने लखनऊ से अपने व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध साझा करते हुए कहा—
“लखनऊ मेरी कर्मभूमि रही है। जनसेवा का संकल्प यहीं से लिया था। उत्तरायणी जैसे आयोजनों में आना, मेरे लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने जैसा है।”
यह संवाद मंच को औपचारिक से भावनात्मक बना गया।
🛕 काशी से केदार तक—विकास के साथ विरासत का पुनर्जागरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत संस्कृति, आस्था और विकास—तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे ऐतिहासिक कार्य इसी सोच का परिणाम हैं।
इसी विज़न पर चलते हुए उत्तराखंड में—
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केदारनाथ–बद्रीनाथ मास्टर प्लान
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केदारखंड–मानसखंड मंदिर माला मिशन
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हरिद्वार–ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर
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हरिपुर यमुना कॉरिडोर
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गोलू जी, विवेकानंद और शारदा कॉरिडोर
जैसी योजनाओं से देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को नई भव्यता मिल रही है।
🏕️ पर्यटन, फिल्म और विवाह का नया हब बनता उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अब केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रहा।
नई नीतियों के चलते राज्य—
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वेडिंग डेस्टिनेशन
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एडवेंचर टूरिज्म हब
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फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन
के रूप में उभर रहा है।
‘वेड इन उत्तराखंड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियान ने पर्यटन और रोजगार को नई गति दी है।
🌾 गांव से अर्थव्यवस्था तक—आत्मनिर्भर उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने बताया कि
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होम-स्टे योजना
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लखपति दीदी योजना
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सौर स्वरोजगार योजना
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एक जनपद–दो उत्पाद
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हाउस ऑफ हिमालयाज
जैसे प्रयासों से गांवों में खुशहाली लौट रही है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है।
📊 आंकड़े जो बदलते उत्तराखंड की कहानी कहते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि—
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अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़ी
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प्रति व्यक्ति आय ₹2,74,064 तक पहुंची
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बजट ₹1 लाख करोड़ के पार
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बिजली उत्पादन 4 गुना
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सड़क नेटवर्क दोगुना
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44% रिवर्स पलायन
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1.68 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
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नीति आयोग SDG इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड देश में प्रथम
ये आंकड़े विकास के दावे नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई हैं।
⚖️ कानून, सुरक्षा और संस्कृति पर सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि—
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देवभूमि की अस्मिता से कोई समझौता नहीं
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सख्त धर्मांतरण और दंगा विरोधी कानून
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10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि मुक्त
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ऑपरेशन कालनेमी से पाखंड पर प्रहार
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250+ अवैध मदरसे सील
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500+ अवैध ढांचे ध्वस्त
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1 जुलाई 2026 के बाद केवल सरकारी सिलेबस वाले मदरसे
समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, वहीं नकल विरोधी कानून से 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी नौकरियां मिलीं।
🔔 “यही है नया उत्तराखंड”
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा—
“यह नया उत्तराखंड है, जहां विकास, विश्वास और अवसर साथ-साथ चलते हैं। देवभूमि को देश का अग्रणी राज्य बनाने का हमारा संकल्प विकल्प रहित है।”
कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, प्रवासी उत्तराखंडी और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।









