देहरादून, 1 जुलाई 2025 —
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्य सेवक सदन’ में आयोजित अंतरिक्ष सम्मेलन 2025 में हिस्सा लिया। यह सम्मेलन विशेष रूप से हिमालयी राज्यों के परिप्रेक्ष्य में ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया था, जिसमें इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की।
🎯 मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “आज अंतरिक्ष तकनीक सिर्फ रॉकेट और अनुसंधान तक सीमित नहीं, बल्कि यह हमारे खेतों से लेकर आपदाओं तक, स्कूलों से लेकर सड़कों तक—हर जगह विकास की नींव बन चुकी है।”
उन्होंने भारतीय वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में तिरंगा फहराने पर देश का गौरव बढ़ाने के लिए बधाई दी और कहा कि यह क्षण हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का नया ज्वार ले आया है।
🛰️ चंपावत मॉडल ज़िला, साइंस सिटी और ‘स्पेस फ्रेंडली स्टेट’ की ओर बढ़ता उत्तराखंड
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने इसरो और यूकॉस्ट द्वारा तैयार डैशबोर्ड का उद्घाटन किया, जो चंपावत को एक मॉडल जिला बनाने की दिशा में कदम है। इस मौके पर इसरो की एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार AI, रोबोटिक्स, ड्रोन और साइंस इनोवेशन सेंटर जैसे अत्याधुनिक विज्ञान केंद्रों की स्थापना पर युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारा सपना है कि उत्तराखंड भारत का पहला ‘स्पेस टेक्नोलॉजी फ्रेंडली स्टेट’ बने।”
🚀 इसरो का प्रेरणादायक सफर: साइकिल से चंद्रयान तक
इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष मिशनों की यात्रा को बेहद भावनात्मक अंदाज़ में साझा करते हुए कहा, “एक दौर था जब हमारे रॉकेट साइकिल पर ले जाए जाते थे, और आज भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड करने वाला पहला देश बन गया है।”
उन्होंने बताया कि भारत अब तक 100 से अधिक रॉकेट लॉन्च कर चुका है और 131 सेटेलाइट का मालिक है। अब देश का लक्ष्य 2030 तक अपना स्पेस स्टेशन और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजना है।
🛰️ सैटेलाइट डेटा से बदली उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने बताया कि उत्तराखंड में चमोली की ऋषिगंगा आपदा से लेकर वनाग्नि नियंत्रण तक, सेटेलाइट तकनीक ने बड़ी भूमिका निभाई है। ग्लेशियर झीलों की मॉनिटरिंग, क्लाउडबर्स्ट की भविष्यवाणी जैसे अनेक प्रयास राज्य को आपदा-प्रबंधन में आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
📡 मुख्यमंत्री का आग्रह और मुख्य सचिव की रणनीति
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इसरो से अपील की कि वह राज्य के कुछ साइंस सेंटरों को गोद ले और 50 सेमी रिजॉल्यूशन की सेटेलाइट इमेजरी को राज्य को नॉन-कमर्शियल आधार पर उपलब्ध कराए। प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और यूकॉस्ट प्रमुख प्रो. दुर्गेश पंत सहित अनेक वैज्ञानिकों और अधिकारियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी उल्लेखनीय बना दिया।
📌 निष्कर्ष:
उत्तराखंड आज सिर्फ हिमालय की गोद में बसा राज्य नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक की बुलंदियों को छूने वाला भविष्य का प्रदेश बन रहा है। ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में यह सम्मेलन एक मजबूत कड़ी साबित होगा — यही विश्वास आज हर उत्तराखंडी की आंखों में झलक रहा था।










