देहरादून —
“स्कूल अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के सपनों को उड़ान देने की प्रयोगशाला बनेंगे।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इन बातों में एक स्पष्ट संदेश था — उत्तराखण्ड अब शिक्षा में सिर्फ आंकड़े नहीं, असली बदलाव देखना चाहता है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की वर्चुअल समीक्षा करते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए — अब शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ योजनाएं नहीं, ज़मीन पर असर दिखना चाहिए।
📚 बालिकाओं की शिक्षा पर खास फोकस:
धामी ने कहा कि नवीं, छठी और पहली कक्षा में प्रवेशोत्सव को जनअभियान की तरह चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक बच्चे स्कूली शिक्षा से जुड़ें। बालिकाओं के ड्रॉपआउट पर चिंता जताते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो बच्चियां स्कूल से छूट गई हैं, उन्हें फिर से मुख्यधारा में लाना राज्य की प्राथमिकता है।
👧 अलग शौचालय और सैनिटरी पैड की व्यवस्था अनिवार्य:
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय हों और सैनिटरी पैड की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्कूल भवनों की सुरक्षा भी मानकों के अनुसार हो।
🎨 शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं:
धामी ने कहा कि कला, रंगमंच, खेलकूद और फिट इंडिया जैसी गतिविधियों को भी स्कूलों का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षकों की भर्ती और छात्रों को समय पर किताबें-ड्रेस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
🚀 स्मार्ट स्कूल और भारत दर्शन यात्रा:
बैठक में बताया गया कि इस साल 1082 मेधावी छात्र भारत दर्शन पर भेजे जाएंगे, जहां वे आईआईटी, आईआईएम और अन्य अग्रणी संस्थानों का भ्रमण करेंगे।
राज्य के 559 क्लस्टर विद्यालय स्मार्ट स्कूल में बदलेंगे, जिनमें 4019 स्मार्ट क्लास चलाई जाएंगी।
🧠 कौशल विकास और नवाचार की शिक्षा पर जोर:
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों को कौशल आधारित और व्यावसायिक शिक्षा दी जाए। जो परिसंपत्तियां उपयोग में नहीं हैं, उनका पुनः उपयोग किया जाए और नवाचार पर नियमित कार्य हों।
🧑🏫 उपस्थित रहे वरिष्ठ अधिकारी:
बैठक में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री रविनाथ रमन, महानिदेशक शिक्षा सुश्री दीप्ति सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।










