देहरादून | 22 जुलाई 2026
देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार जल्द ही उत्तराखंड संस्कृत आयोग का गठन करने जा रही है। आयोग को अधिक प्रभावी और दूरदर्शी बनाने के लिए सरकार ने देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों और संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं। इन सुझावों के आधार पर आयोग की कार्ययोजना और स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संस्कृत को आधुनिक दौर से जोड़ने की तैयारी
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में एक नई पहल की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान संस्कृत के संरक्षण और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग के गठन की आवश्यकता पर बल दिया था।
इसी दिशा में 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी होगा संस्कृत का विस्तार
प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक के साथ भी इस भाषा को जोड़ने का प्रयास करेगा।
आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास, रोजगार, प्रशासनिक कार्यों और तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीकों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी विशेष फोकस रहेगा, ताकि यह भाषा आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक उपयोगी एवं प्रासंगिक बन सके।
दीर्घकालिक नीति तैयार करेगा आयोग
सरकार का मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों की आधारशिला है। प्रस्तावित आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां तैयार करेगा और समय के अनुरूप नई कार्ययोजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस प्राचीन भाषा को केवल धार्मिक और शैक्षणिक दायरे तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुंचाया जाए तथा आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नई पहचान दी जाए।
सरकार का मानना है कि संस्कृत आयोग के गठन से भाषा के संरक्षण के साथ-साथ शोध, शिक्षा, तकनीक और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे, जिससे उत्तराखंड इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।









