“ये सम्मान मेरा नहीं, उत्तराखंड की जनता का है।”
जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ‘मुख्य सेवक सदन’ में ये शब्द कहे, तो तालियों की गूंज सिर्फ़ एक नेता के सम्मान की नहीं, एक ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही दे रही थी।
उत्तराखंड, भारत का पहला राज्य बना है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू कर संविधान की आत्मा को ज़मीन पर उतार दिया है।
🧩 एक कानून, एक अधिकार — सबके लिए समान न्याय
मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा कि UCC का लागू होना बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि इस संहिता से अब सभी नागरिकों के अधिकार एक समान हो गए हैं — धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं रहेगा।
🎯 महिलाओं को मिली सुरक्षा की ढाल:
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर बहन-बेटियों को सामाजिक सुरक्षा दी गई है। यह बदलाव सिर्फ़ कानून नहीं, एक सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण है।
🌊 उत्तराखंड से निकली UCC की गंगा, देशभर में बहेगी विचारों की धारा
“UCC की यह गंगा उत्तराखंड से निकली है, लेकिन ये जल्द ही पूरे देश में बहेगी…”
धामी जी का यह कथन केवल आत्मविश्वास नहीं, राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में बाबा साहेब की स्मृतियों से जुड़े स्थानों को ‘राष्ट्र चेतना के पंच तीर्थ’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
🛡️ कड़े क़दम, साफ़ मंशा — धामी सरकार का स्पष्ट रुख
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर राज्य सरकार के अन्य निर्णायक फैसलों का भी ज़िक्र किया:
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🧱 सख्त दंगारोधी कानून
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🛐 धर्मांतरण विरोधी अधिनियम
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🕵️♂️ ऑपरेशन कालनेमि जैसी कार्रवाईयां
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🧬 राज्य की डेमोग्राफिक संरचना की रक्षा का वादा
इन बातों से यह संदेश स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार कानून के शासन, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता की त्रिवेणी पर चल रही है।
🙏 कौन-कौन रहा शामिल?
इस ऐतिहासिक समारोह में कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं:
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पूर्व राज्यपाल व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी
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साध्वी रेणुका व स्वामी निरंजन चैतन्य महाराज
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आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला
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विधायक सुरेश गड़िया
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सफीपुर (उन्नाव, उत्तर प्रदेश) से विधायक श्री बंबा लाल दिवाकर सहित अन्य गणमान्य लोग










