पंतनगर। उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष पर पंतनगर कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की थोड़ी सी खुली हवा और सियावत मिट्टी में आज देश की सच्ची ताकत — हमारे किसान — की गूँज सुनाई दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के व्यापक कृषक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए किसानों के परिश्रम, त्याग और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि यही मेहनत हमारी सच्ची पूंजी है।
धामी ने समारोह में कृषि, उद्यान, दुग्ध, मत्स्य और सहकारिता के प्रगतिशील किसानों व ‘लखपति दीदियों’ को प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी समेत सरकार और प्रशासन के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भावुक अंदाज में बताया कि खेती उनके लिए केवल पेशा नहीं, आत्मीयता है — “मेरे पिता जवान भी थे और किसान भी थे।” इसलिए वे आज भी समय मिलने पर अपने गाँव की धरती से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि खेती ने समाज की परंपराओं और त्योहारों को आकार दिया है और हमारे शास्त्र भी कृषि को जीवन का आधार मानते हैं।
धामी ने केंद्र सरकार की नीतियों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और अन्य स्कीमों को किसानों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद किसानों के सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं और उत्तराखंड में करीब 9 लाख अन्नदाताओं को इस योजना का लाभ मिल रहा है।
सरकार की किसानी पर ध्यान देने वाली पहलें भी उन्होंने गिनाईं — MSP में बढ़ोतरी, प्रधानमंत्री फसल बीमा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और किसानों को तीन लाख तक का बिना ब्याज ऋण। फॉर्म मशीनरी बैंक के जरिए कृषि उपकरणों पर 80% तक सब्सिडी मिल रही है और नहरों से सिंचाई पूरी तरह मुफ्त की जा चुकी है — छोटी-छोटी बातें मिलकर किसानों की आर्थिक दशा बदल रही हैं। 👏
किसान आय बढ़ाने के लिए राज्य ने पॉलीहाउस निर्माण के लिए 200 करोड़ का प्रावधान किया; अब तक करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। गेहूँ खरीद पर बोनस, गन्ने की दरों में वृद्धि और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग (लगभग 1,000 करोड़) जैसी परियोजनाएं भी चालू हैं। फलोत्पादन और बागवानी को बढ़ावा देने हेतु नई नीतियाँ — सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मिलेट प्रोत्साहन — लागू की जा चुकी हैं और इनपर भारी सब्सिडी दी जा रही है। 🍏🍇
प्रदेश में अब ग्रेडिंग-सॉर्टिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, मशरूम इकाइयां, और खाद्य प्रसंस्करण की मजबूत इकाइयाँ बनी हैं — परिणाम साफ़ हैं: फलों की उत्पादकता पहले 1.82 मैट्रिक टन/हेक्टेयर से बढ़कर 4.52 तक पहुँची, मशरूम उत्पादन में ज़बरदस्त उछाल हुआ और शहद का उत्पादन भी बढ़ा। चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ कर ‘टी-टूरिज्म’ से स्थानीय युवाओं को रोज़गार के नये रास्ते मिले हैं — चम्पावत, नैनीताल, बागेश्वर जैसे इलाकों में चाय व पर्यटन का मेल ख़ास रहा। ☕🌄
धामी ने किसानों से आह्वान किया कि मिलकर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आधुनिक कृषि-राज्य बनाएं — “आपका परिश्रम, हमारी नीतियाँ और केंद्र का सहयोग मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वर्णिम भविष्य बनायेंगे।” कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टालों का निरीक्षण भी किया और स्थानीय मुद्दों पर बातचीत की।
किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी रजत जयंती की बधाई दी और पिछले 25 वर्षों में हुए कृषि व उद्यानिकी विकास की सराहना की। मंत्री ने कहा कि आज राज्य बागवानी के मामले में कश्मीर व हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है और महिलाओं के समूहों के जरिए 1.65 लाख महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं — यह परिवर्तन और समावेशिता की कहानी है। ✨
सम्मेलन में स्थानीय विधायक तिलकराज बेहड़ सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे — जिन्हें मुख्यमंत्री ने सम्मान और आत्मीयता दोनों से नहलाया। यह कार्यक्रम सिर्फ़ नीतियों की चर्चा नहीं था, बल्कि उन हाथों और चेहऱों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था जो हर दिन हमारी थाली तक अन्न पहुँचाते हैं।










