वभूमि से अब दुनिया को बुलावा — हिमालय तैयार है, नई चुनौतियों के स्वागत को 🎯
देहरादून | (तारीख)
देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतारोहण को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय की 83 प्रमुख चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोल दिया है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) और वन विभाग के समन्वय से लिया गया यह निर्णय न केवल राज्य को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा, बल्कि पहाड़ के युवाओं के लिए नए सपनों और रोज़गार के रास्ते भी खोलेगा।
⛰️ 5,700 से 7,756 मीटर तक की चुनौती — हिमालय का असली चेहरा
खोली गई चोटियों में कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा, त्रिशूल, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध चोटियां शामिल हैं।
ये वही शिखर हैं, जिनका नाम आते ही पर्वतारोहियों की धड़कन तेज़ हो जाती है — कठिन तकनीकी मार्ग, बर्फीली हवाएं और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य।
🗣️ “हिमालय हमारी पहचान है” — सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,
“हिमालय हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारी शक्ति है। 83 प्रमुख चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को साहसिक खेलों से जोड़ना, स्थानीय लोगों को रोज़गार देना और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
🇮🇳 भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत
इस फैसले से देश के युवा पर्वतारोहियों को बड़ी राहत मिली है।
👉 अधिसूचित 83 चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों से कोई पीक फीस, कैंपिंग फीस या पर्यावरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पहले यह शुल्क IMF और वन विभाग के माध्यम से लिया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं इसका वहन करेगी।
यह कदम आर्थिक बाधाओं को तोड़ते हुए उन युवाओं के लिए रास्ता खोलेगा, जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते थे।
🌍 विदेशी पर्वतारोहियों के लिए आसान और पारदर्शी व्यवस्था
विदेशी पर्वतारोहियों पर लगने वाला राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
अब उन्हें केवल भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) द्वारा तय शुल्क ही देना होगा।
इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय अपील और विदेशी अभियानों की संख्या में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
💻 ऑनलाइन आवेदन से मिलेगी तेज़ मंज़ूरी
अब सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए होंगे।
यह डिजिटल प्रणाली अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाएगी।
🏡 सीमावर्ती गांवों में रोज़गार और उम्मीद की रोशनी
इस फैसले से सीमावर्ती और दूर-दराज़ के गांवों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
👉 गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय सेवाओं के ज़रिए रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
🌱 सुरक्षा और पर्यावरण पर कोई समझौता नहीं
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पर्वतारोहण अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा।
👉 पर्वतारोहियों को “Leave No Trace” सिद्धांत अपनाना होगा, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।
📌 केंद्र सरकार का भी बड़ा समर्थन
गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की घोषणा की है।
यह कदम भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।










