देहरादून, जुलाई 2025 —
सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों के परिजनों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें रात गुजारने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में आज सचिवालय में एक ऐसा फैसला लिया गया, जो न केवल मानवीय दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे को भी संवेदनशीलता के साथ मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में तीमारदारों के लिए विश्राम गृह (रैन बसेरा) बनाए जाएंगे। इसके लिए दोनों कॉलेजों और सेवादान आरोग्य संस्था के बीच एक एम.ओ.यू. (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री धामी ने इस मौके पर कहा,
“बीमार व्यक्ति के साथ अस्पतालों में मौजूद परिजनों की तकलीफ को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। ये विश्राम गृह उनके लिए छांव की तरह होंगे, जहां उन्हें रात्रि विश्राम और भोजन की सुविधा बेहद कम दरों पर मिलेगी।”
मुख्यमंत्री ने आगे सुझाव दिया कि किच्छा स्थित एम्स सैटेलाइट सेंटर में भी ऐसी ही व्यवस्था की जानी चाहिए, जिस पर संस्था ने सहमति जताई।
🛏️ क्या होगी व्यवस्था?
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दोनों मेडिकल कॉलेजों में 350 बिस्तरों वाले विश्राम गृह बनाए जाएंगे।
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₹55 प्रति बिस्तर और ₹300 प्रति दो बिस्तरों वाले कमरे की दर तय की गई है।
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नाश्ता ₹20 और भोजन ₹35 में उपलब्ध होगा।
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संचालन और रखरखाव का जिम्मा सेवादान आरोग्य फाउंडेशन संभालेगा।
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दून मेडिकल कॉलेज की ओर से 1750 वर्गमीटर और हल्द्वानी कॉलेज की ओर से 1400 वर्गमीटर भूमि दी जाएगी।
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यह एम.ओ.यू. 20 वर्षों के लिए मान्य रहेगा।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, और सेवादान संस्था के अभिषेक सक्सेना, आनंद सिंह बिसेन और अमित दास भी उपस्थित रहे।
यह समझौता दर्शाता है कि राज्य सरकार केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि हर उस व्यक्ति की चिंता कर रही है जो अपने परिवार के साथ संकट की घड़ी में अस्पताल पहुंचता है। उत्तराखंड अब केवल स्वास्थ्य सेवाओं में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के स्तर पर भी उदाहरण बन रहा है।










