🛕 धार्मिक आस्था को मिलेगा नया संबल: धामी सरकार ने मंदिरों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए उठाया बड़ा कदम

उत्तराखंड की पावन धरती पर हर रोज़ हज़ारों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए दूर-दराज़ से पहुंचते हैं — कोई माँ मनसा देवी की कृपा चाहता है, तो कोई जागेश्वर में भोलेनाथ के चरणों में सुकून। लेकिन श्रद्धा के इस सफ़र में जब अव्यवस्था, भीड़ और असुरक्षा आड़े आती है, तो मन खिन्न हो जाता है।

इसी पीड़ा को समझते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में एक अहम बैठक बुलाई। इस उच्च स्तरीय चर्चा का मकसद सिर्फ़ एक था — श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में दर्शन को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना।

🎯 कौन-कौन से मंदिर?
हरिद्वार के मनसा देवी व चंडी देवी मंदिर, टनकपुर स्थित पूर्णागिरि धाम, नैनीताल का कैंची धाम, अल्मोड़ा का जागेश्वर मंदिर और पौड़ी का नीलकंठ महादेव मंदिर—ये सभी स्थान अब सरकार की प्राथमिक सूची में हैं।


🧭 मुख्यमंत्री के निर्देश: सिर्फ़ बातें नहीं, ठोस कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि:

  • 🧑‍💻 श्रद्धालु पंजीकरण अब अनिवार्य होगा

  • 🚶 पैदल मार्ग और सीढ़ियों को चौड़ा किया जाएगा

  • 🚧 अतिक्रमण हटाया जाएगा, दुकानें होंगी व्यवस्थित

  • 🚔 भीड़ नियंत्रण के लिए चरणबद्ध दर्शन योजना बनेगी

  • 🚻 मूलभूत सुविधाएं – जल, शौचालय, मेडिकल सहायता – सुलभ हों

धामी जी ने यह भी तय किया कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों की अध्यक्षता में एक समन्वय समिति बनाई जाएगी, जिसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, विकास प्राधिकरण और कार्यदायी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


🧘 धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया जीवन

इस कदम को न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा बल्कि धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने की दिशा में भी बड़ा प्रयास माना जा रहा है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तीर्थाटन की भूमिका अहम रही है, और इस नई योजना से आस्था व प्रशासन के बीच समन्वय बेहतर होगा।


📌 बैठक में कौन-कौन रहा शामिल?

इस अहम बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, एस.एन. पांडेय, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, एडीजी ए.पी. अंशुमन, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और अपर सचिव बंशीधर तिवारी भी मौजूद रहे।