देहरादून, जुलाई 2025 |
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में एक गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए चिकित्सकों को सम्मानित किया। इस खास दिन पर ‘धरती के भगवानों’ को न सिर्फ सम्मान मिला, बल्कि उनकी निःस्वार्थ सेवा, संवेदना और समर्पण को भी पूरे राज्य ने सलाम किया।
🎯 सीएम धामी ने कहा – “डॉक्टरी सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और आत्मबल का संगम है। एक डॉक्टर संकट की घड़ी में आशा की किरण बनता है – यही उसे विशेष बनाता है।”
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में हुए क्रांतिकारी बदलावों की भी जानकारी दी –
✅ राज्य की स्वास्थ्य क्रांति – कुछ बड़े कदम:
🔹 58 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड वितरित – हर घर तक पहुंच रही है मुफ़्त इलाज की सुविधा।
🔹 11 लाख से ज्यादा मरीजों को मिला ₹2100 करोड़ का कैशलेस उपचार – कोई आर्थिक बोझ नहीं।
🔹 हर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना – अब दूरदराज़ इलाकों में भी मिलेंगी आधुनिक सेवाएं।
🔹 हल्द्वानी में उत्तराखंड का पहला आधुनिक कैंसर संस्थान निर्माणाधीन – गंभीर बीमारियों से लड़ने को तैयार राज्य।
🔹 हेली एंबुलेंस सेवा शुरू – अब ऊँचाई या दूरी कोई बाधा नहीं।
🔹 207 पैथोलॉजिकल जांचें निःशुल्क – आमजन को राहत।
🔹 टेलीमेडिसिन सेवा से गांवों तक विशेषज्ञ सलाह – इलाज अब स्क्रीन के उस पार भी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉक्टर्स सिर्फ बीमारियों के इलाज करने वाले नहीं, बल्कि वे उस क्षण में जीवन का भरोसा बन जाते हैं, जब रोगी और उसका परिवार पूरी तरह निराश हो जाता है।
🚨 कोरोना महामारी की यादों को करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “जब पूरी दुनिया थम गई थी, तब डॉक्टर ही थे जिन्होंने PPE किट में लिपटकर, अपनों से दूर रहकर, खुद को खतरे में डालकर लोगों की जानें बचाईं – वो सेवा कभी भुलाई नहीं जा सकती।”
मुख्यमंत्री ने भारतीय चिकित्सा परंपरा की भी चर्चा की और आचार्य नागार्जुन, महर्षि सुश्रुत जैसे महान वैज्ञानिकों को याद करते हुए कहा कि भारत की जड़ें विज्ञान और सेवा दोनों में गहराई से बसी हैं।
कार्यक्रम में डॉ. आर.के. जैन, डॉ. गीता खन्ना, डॉ. सुनीता टम्टा, डॉ. कृष्ण अवतार सहित राज्य के सभी प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सक शामिल रहे।
🎁 मुख्यमंत्री ने सभी डॉक्टरों से अपील की – “आप समाज में विश्वास और श्रद्धा की वो मिसाल हैं, जिसे मजबूत बनाए रखें। सेवा की यह ज्योति कभी बुझने न दें।”










