हिमालय की सुरक्षा पर बड़ा मंथन: आईआईटी रुड़की कार्यशाला में मुख्यमंत्री धामी का फोकस – आपदा से पहले तैयारी
रुड़की | 17 जनवरी 2026
देवभूमि उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा से पहले तैयारी ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है। इसी संदेश के साथ मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में आयोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला केवल अकादमिक चर्चा नहीं, बल्कि नीति, तकनीक और समुदाय को जोड़कर ठोस समाधान गढ़ने का मंच है। यहां आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर गहन मंथन होगा, जिससे उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे हिमालयी क्षेत्र को लाभ मिलेगा 🎯।
हिमालयी राज्य और आपदाओं की चुनौती
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमस्खलन और वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समयबद्ध तैयारी और सामूहिक प्रयास अपनाकर इन आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
4P मंत्र और 10-सूत्रीय एजेंडा
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 4P मंत्र – Predict, Prevent, Prepare, Protect के आधार पर राज्य सरकार 10-सूत्रीय आपदा प्रबंधन एजेंडा पर लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में:
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AI आधारित चेतावनी प्रणालियां
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डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
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ग्लेशियर रिसर्च सेंटर
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ड्रोन सर्विलांस
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GIS मैपिंग और सैटेलाइट मॉनिटरिंग
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रैपिड रिस्पॉन्स टीमें
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फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम
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वनाग्नि प्रबंधन कार्ययोजना
जैसे आधुनिक उपाय जमीनी स्तर पर लागू किए जा रहे हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर एक मजबूत आपदा प्रतिक्रिया तंत्र तैयार किया गया है।
आईआईटी रुड़की की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने आईआईटी रुड़की की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार, आईआईटी के सहयोग से:
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भूकंप चेतावनी प्रणाली का विस्तार
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भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग
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बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास
पर तेजी से काम कर रही है।
पर्यावरण संतुलन और जल संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण राज्य की प्राथमिकता है। पौधारोपण, जल संरक्षण और सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्प्रिंग रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में सूखते जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है 🌱।
सुरक्षित निर्माण की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भूकंपरोधी और सुरक्षित घरों व इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर जोर देने और अधिकारियों से सुरक्षा मानकों का सख़्ती से पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के जोनल कॉर्डिनेटर श्री भगवती प्रसाद राधव, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत, उपनिदेशक प्रो. यू. पी. सिंह, प्रो. संदीप सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।










