भुजियाघाट की पहाड़ियों पर गुरुवार की सुबह कुछ अलग ही ऊर्जा लेकर आई। हवा में जड़ी-बूटियों की महक और युवाओं की उम्मीदें… और इसी वातावरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने PGICON–2025 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।
यह आयोजन काया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुआ, जिसमें WHO सहयोगी संस्थान JPNATC, AIIMS दिल्ली भी शामिल रहा। 🎯
मुख्यमंत्री के शब्दों में एक साफ संदेश था—
“आयुर्वेद सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन की आत्मा है।”
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने स्वास्थ्य को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन से जोड़कर देखा था, और यही आयुर्वेद का मूल है।
🌍 “उत्तराखंड को ग्लोबल सेंटर ऑफ आयुर्वेद एंड वेलनेस बनाना हमारा संकल्प”
CM धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को जितनी तेज़ी से वैश्विक पहचान मिली है, वह अभूतपूर्व है।
राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—
उत्तराखंड को विश्वस्तरीय आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस टूरिज़्म का प्रमुख केंद्र बनाना।
उन्होंने बताया कि राज्य में आयुर्वेदिक कॉलेजों, शोध केंद्रों और योग ग्रामों को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त किया जा रहा है।
क्योंकि देवभूमि की धरती सदियों से औषधीय वनस्पतियों, योग और अध्यात्म की प्रयोगशाला रही है।
🕉️ दो नए Economic Spiritual Zones की घोषणा — उत्तराखंड में आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था को नई उड़ान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की—
राज्य में दो इकोनॉमिक स्प्रिचुअल ज़ोन बनाए जाएंगे, एक गढ़वाल और एक कुमाऊँ मंडल में।
इनका उद्देश्य होगा—
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योग
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ध्यान
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आयुर्वेद
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आध्यात्मिक पर्यटन
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परंपरागत औषधीय उद्यम
को नए अवसर देना।
CM ने कहा कि इससे प्रदेश वेलनेस-इकोनॉमी मॉडल की दिशा में आगे बढ़ेगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार व उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे। ✨
🌿 “आयुर्वेद हमारी संस्कृति की जीवित परंपरा है” — सांसद अजय भट्ट
सांसद अजय भट्ट ने कहा कि मोदी सरकार ने आयुर्वेद को गांव-गांव और दुनिया के हर कोने तक पहुँचाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं।
उन्होंने इसे “भारत की सांस्कृतिक धरोहर” बताया और कहा कि इसे जन-जन तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।
📚 “युवाओं को प्रेरित करने वाला सम्मेलन” — विधायक बंशीधर भगत
विधायक बंशीधर भगत ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ चिकित्सा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि उत्तराखंड जैसी औषधीय संपदा से भरपूर भूमि में ऐसे सम्मेलन युवाओं और शोधकर्ताओं को नया दृष्टिकोण देंगे।









