उत्तराखंड के वाहन चालकों को बड़ी राहत: CM धामी का फैसला—फिटनेस फीस बढ़ोतरी अब एक साल तक नहीं 🚖✨

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कर दिया है कि 15 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में बढ़ोतरी एक साल तक लागू नहीं होगी।

इसका मतलब है कि—
👉 21 नवंबर 2026 तक पुरानी फीस ही लागू रहेगी।
👉 वाहन मालिकों को किसी तरह का नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
👉 आगे की दरें केंद्र सरकार के नए पुनरीक्षण के बाद ही लागू होंगी।

यह फैसला उस समय आया है, जब केंद्र सरकार ने हाल ही में फिटनेस फीस को 10 गुना तक बढ़ाने का निर्णय लिया था। इससे टैक्सी ड्राइवरों, ट्रक ऑपरेटरों और छोटे कमर्शियल वाहन मालिकों के बीच चिंता बढ़ गई थी।

लेकिन अब मुख्यमंत्री धामी के सीधे हस्तक्षेप से उत्तराखंड के वाहन मालिकों को तुरंत राहत मिल गई है।


जनभावनाओं को समझते हुए लिया गया निर्णय 🚩

राज्य सरकार की ओर से परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसे सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत ने जारी किया।

मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा कि—

“हम जनता को अनावश्यक बोझ में नहीं धकेलना चाहते। केंद्र द्वारा की गई फीस वृद्धि को फिलहाल लागू न करने का फैसला प्रदेश के वाहन मालिकों के हित में लिया गया है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गरीब, मध्यम वर्ग, टैक्सी यूनियन, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हजारों परिवारों पर अचानक बढ़े वित्तीय बोझ का असर न पड़े।

सरकार की प्राथमिकता—जनता की जेब सुरक्षित रखना

धामी ने कहा कि—

“हमारी सरकार का संकल्प है—जनता को राहत देना और जनहित में त्वरित निर्णय लेना।
जब तक केंद्र सरकार फिटनेस फीस पर नया पुनरीक्षण नहीं करती, उत्तराखंड में पुरानी फीस ही लागू रहेगी।”

उनका यह संदेश साफ है कि सरकार हर उस मुद्दे पर संवेदनशील है, जो सीधे आम जनता की जेब पर असर डालता है।


यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

  • उत्तराखंड में हजारों छोटे परिवहन व्यवसायी अपने वाहन से परिवार चलाते हैं।

  • अचानक बढ़ी फिटनेस फीस उनके लिए एक बड़ा वित्तीय झटका हो सकती थी।

  • इस स्थगन से टैक्सी–ट्रक यूनियन और छोटे वाहन धारकों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी।

  • पर्यटन राज्य होने के नाते परिवहन क्षेत्र का बोझ कम होने से यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

यह फैसला आज जनता की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप और धरातल से जुड़ा हुआ निर्णय माना जा रहा है।