🏔️ देवभूमि में इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” पर उत्तराखंड का आत्मविश्वास दुनिया के सामने
हिमालयन कल्चरल सेंटर, गढ़ी कैंट… माहौल में गर्व था, आंखों में आत्मविश्वास और शब्दों में इतिहास रचने की अनुभूति।
उत्तराखंड ने जब प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” मनाया, तो यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समरस, समान और सशक्त समाज की सार्वजनिक घोषणा थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से साफ शब्दों में कहा—
“यूसीसी की घोषणा से लेकर उसका ज़मीन पर सफल क्रियान्वयन, मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी गौरव का विषय है।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी, प्रशासनिक अधिकारियों और वीएलसी (Village Level Coordinators) को सम्मानित किया, जिन्होंने इस ऐतिहासिक कानून को जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन कर उन्होंने इस पूरी यात्रा को स्मरण किया।
📜 संविधान की आत्मा को धरातल पर उतारने का दिन
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह दिन उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा।
उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में स्थान दिया था।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमने 2022 के चुनाव से पहले जो संकल्प लिया था, उसे देवभूमि की जनता के आशीर्वाद से साकार किया।” 🎯
उन्होंने पूरी टाइमलाइन भी साझा की—
-
7 फरवरी 2024: यूसीसी विधेयक विधानसभा से पारित
-
11 मार्च 2024: राष्ट्रपति की स्वीकृति
-
27 जनवरी 2025: उत्तराखंड में यूसीसी लागू
🌸 महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण समाज में असमानता और अन्याय पनप रहा था।
यूसीसी लागू होने से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।
अब—
-
हलाला
-
बहुविवाह
-
तीन तलाक
-
बाल विवाह
जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगी है।
👉 यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में हलाला या बहुविवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया, और यही वजह है कि मुस्लिम महिलाओं ने भी इस कानून का स्वागत किया है।
⚖️ समानता से समरसता की ओर
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा—
“समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि कुप्रथाओं के खिलाफ है।”
यूसीसी के तहत—
-
विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के नियम सभी के लिए समान
-
संपत्ति में बेटा-बेटी का कोई भेद नहीं
-
मृत्यु के बाद पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार
इससे पारिवारिक विवादों की संभावनाएं भी काफी हद तक समाप्त होंगी।
🔐 लिव-इन रिलेशनशिप: सुरक्षा और अधिकार दोनों
युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि—
-
सूचना पूरी तरह गोपनीय रहेगी
-
बच्चों को जैविक संतान के समान अधिकार मिलेंगे
-
यह व्यवस्था किसी की निजता नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है
🚀 आंकड़े जो सफल क्रियान्वयन की कहानी कहते हैं
यूसीसी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहा—
-
पहले औसतन 67 विवाह पंजीकरण/दिन
-
अब 1400+ पंजीकरण/प्रतिदिन
-
30% से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत पंजीकरण
-
5 लाख+ आवेदन, जिनमें 95% से अधिक का निस्तारण
-
7,500+ कॉमन सर्विस सेंटर जनता के लिए सक्रिय
🚨 धोखाधड़ी पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए संशोधन के तहत—
-
विवाह में पहचान छिपाने या गलत जानकारी देने पर विवाह निरस्त
-
विवाह और लिव-इन में धोखाधड़ी, दबाव या बल प्रयोग पर कठोर सजा
🇮🇳 मजबूत फैसले देश को जोड़ते हैं
धामी ने कहा कि—
“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संकल्प आज सिद्धि बन चुका है।”
उन्होंने अफवाहों पर भी विराम लगाते हुए कहा कि
-
यूसीसी से कोई मूल निवासी नहीं बनता
-
लिव-इन पंजीकरण बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए है
“जैसे मां गंगा देवभूमि से निकलकर पूरे देश को जीवन देती हैं, वैसे ही उत्तराखंड से निकली यूसीसी की धारा पूरे भारत को प्रेरित करेगी।” 🌊










