स्वस्थ सीमा अभियान: ITBP के साथ मिलकर उत्तराखंड सरकार का सीमावर्ती गांवों के लिए ऐतिहासिक कदम

🇮🇳 सीमांत गांवों तक सेहत की मजबूत ढाल

उत्तराखंड में ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ से बदलेगी बॉर्डर एरिया की तस्वीर

उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों के लिए आज का दिन एक नई उम्मीद लेकर आया। दुर्गम पहाड़ों में बसे उन गांवों के लिए, जहां आज भी अस्पताल तक पहुंच किसी चुनौती से कम नहीं, वहां अब सेहत खुद दरवाज़े तक पहुंचेगी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बीच ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के तहत ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा भी उपस्थित रहे।

🏔️ 108 सीमावर्ती गांव, एक साझा संकल्प

इस एमओयू के तहत पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जनपदों के 108 सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों को एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी। यह अभियान फेज-1 के रूप में शुरू किया गया है, ताकि सबसे पहले उन इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचें, जहां जरूरत सबसे ज़्यादा है।

आईटीबीपी अपने अनुभवी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, एमआई रूम और टेली-मेडिसिन सुविधाओं के जरिए नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करेगी। ग्रामीणों के मेडिकल हेल्थ कार्ड, दवाइयों, उपकरणों और रिकॉर्ड का व्यवस्थित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं राज्य सरकार गांवों का जनसांख्यिकीय डेटा, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, आपातकालीन निकासी, दूरसंचार सहायता और समय-समय पर दवाओं की आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाएगी।

🩺 भरोसा, सुरक्षा और स्थायित्व की ओर कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,

“स्वस्थ सीमा अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस और प्रभावी पहल है। यह केवल स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि भरोसा, सुरक्षा और स्थायित्व भी देता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमांत क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है और यह एमओयू उसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

🐐🥛 लोकल से बॉर्डर तक – ‘वोकल फॉर लोकल’ की मिसाल

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आईटीबीपी और राज्य सरकार के बीच पहले से चले आ रहे स्थानीय उत्पाद आपूर्ति एमओयू के तहत नवंबर 2024 से ट्रायल और मार्च 2025 से 100% आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

अब तक ₹11.94 करोड़ से अधिक मूल्य के

  • जीवित भेड़-बकरी

  • मुर्गा

  • हिमालयन ट्राउट मछली

  • ताज़ा दूध, पनीर और टीपीएम

की खरीद हो चुकी है। इससे पशुपालकों, मत्स्य पालकों और दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है।

🚁 हेली सेवाएं, हेल्थ और रोजगार – तीनों को रफ्तार

उत्तराखंड टूरिज्म के साथ हुए हेलीपैड समझौते के तहत अब तक 221 सफल हेली लैंडिंग कराई जा चुकी हैं, जिससे दुर्गम इलाकों में संपर्क और आपूर्ति मजबूत हुई है। आने वाले समय में UCADA हेलीकॉप्टर सेवाओं के उपयोग को लेकर भी एमओयू प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि Point to Point Model के जरिए 550 से अधिक सीमावर्ती लोग सीधे लाभान्वित हुए हैं, जहां कोई बिचौलिया नहीं है। इससे रोजगार बढ़ा, आय में इज़ाफा हुआ और रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा मिला है।

🌱 पर्यावरण से लेकर SDG तक

यह मॉडल पर्यावरण के लिहाज़ से भी बेहद लाभकारी है। स्थानीय स्तर पर खरीद से कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और यह पहल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में से 10 लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान दे रही है।

कार्यक्रम में सचिव डॉ. बी. वी. आर. सी. पुरुषोत्तम, आईजी आईटीबीपी श्री संजय गुंज्याल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।