देहरादून।
मुख्यमंत्री आवास में आज का सुबह का माहौल थोड़ा भावुक, थोड़ा गरिमामय था। एक सादगी भरे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रख्यात हिंदी कथाकार स्व. शैलेश मटियानी को मरणोपरांत दिया गया “उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2025” उनके पुत्र राकेश मटियानी को सौंपा। यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, उत्तराखण्ड के उस साहित्यिक प्रहरी को सलामी थी, जिसने अपनी कहानियों से पहाड़, शहर, संघर्ष और संवेदना – सबको एक साथ जोड़ा। 🎯
सीएम धामी ने इस मौके पर कहा कि शैलेश मटियानी सिर्फ लेखक नहीं, संवेदनाओं के कुशल शिल्पी थे। आधुनिक हिंदी कहानी आंदोलन में उनका योगदान ऐसा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आम आदमी की जिंदगी, उसकी पीड़ा, अकेलापन, हाशिए पर खड़ी ज़िंदगी – सब उनकी कहानियों में बिना बनावट के, सच्चाई के साथ सामने आता है।
उन्होंने याद दिलाया कि मटियानी जी की “बोरीवली से बोरीबन्दर”, “मुठभेड़”, “अधागिनी”, “चील” जैसी कृतियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को समाज को नए नज़रिए से देखने की सीख देती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान, दरअसल समाज की आत्मा का सम्मान है, और उत्तराखण्ड सरकार हमेशा उन प्रतिभाओं को सिर माथे पर रखेगी, जिन्होंने अपनी लेखनी से पीढ़ियों को राह दिखाई।
समारोह में जब मुख्यमंत्री ने सम्मान-पत्र और स्मृति चिन्ह राकेश मटियानी को सौंपा, तो माहौल में गर्व और भावुकता दोनों थी। राकेश मटियानी ने उत्तराखण्ड सरकार और मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान सिर्फ परिवार का नहीं, बल्कि साहित्य प्रेमियों, पाठकों और मटियानी जी के सैकड़ों प्रशंसकों का भी सम्मान है।
कार्यक्रम में सचिव विनोद कुमार सुमन, कई वरिष्ठ अधिकारी, साहित्यकार और परिवारजन मौजूद रहे और सभी ने इस सम्मान को उत्तराखण्ड की साहित्यिक परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में महसूस किया।










