देश की प्रशासनिक व्यवस्था और जनसेवा की भावना को नई पहचान देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन-1 एवं 2’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ भवनों का उद्घाटन नहीं, बल्कि “भारत की सेवा संस्कृति के नए युग की शुरुआत” है।
🏛️ क्या है ‘सेवा तीर्थ’?
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ का निर्माण नागरिक सेवा के मूल मंत्र — “नागरिक देवो भव” — की भावना से प्रेरित होकर किया गया है।
👉 यह परिसर प्रशासनिक कार्यों को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
👉 इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, कर्तव्य और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
✨ “एक नया इतिहास बनते देख रहे हैं” — प्रधानमंत्री
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:
“आज हम सब एक नया इतिहास रचे जाने के साक्षी हैं। यह सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा के लिए अटूट संकल्प का प्रतीक है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, इंजीनियरों और श्रमिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई और धन्यवाद दिया।
📲 सोशल मीडिया पर भी साझा की भावनाएं
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
👉 सेवा तीर्थ ‘भारत प्रथम’ के सिद्धांत का उज्ज्वल प्रतीक बनेगा
👉 यह पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रहित के लिए प्रेरित करेगा
🎯 क्यों अहम है यह परियोजना?
विशेषज्ञों के अनुसार:
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यह प्रशासनिक ढांचे के आधुनिकीकरण का बड़ा कदम है
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सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी
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नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में मजबूत संदेश जाएगा
🇮🇳 “सेवा, करुणा और कर्तव्य” की नई पहचान
इस परियोजना को देश की शासन प्रणाली में एक प्रतीकात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है — जहां प्रशासन का केंद्र “नागरिक” है और सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता।










