गुप्तकाशी की ठंडी हवा और पहाड़ों के बीच बुधवार को एक नई उम्मीद का सूरज उगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चतुर्थ सीमांत पर्वतीय बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि राज्य में सीमांत क्षेत्र विकास परिषद (Border Area Development Council) का गठन किया जाएगा।
उन्होंने कहा — “सीमांत इलाकों की प्रगति सिर्फ सड़कों और भवनों से नहीं, बल्कि वहां के लोगों की सोच, शिक्षा, और आत्मनिर्भरता से तय होगी।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि सीमांत जनपदों में नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे जहाँ आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण दिए जाएंगे। ये केंद्र पहाड़ की जीवनरेखा बनेंगे, जहाँ से विकास की रोशनी हर गांव तक पहुँचेगी।
🧠 बाल वैज्ञानिकों की चमक से रोशन हुआ गुप्तकाशी
मुख्यमंत्री धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस आयोजन की शुरुआत की और विभिन्न जिलों से आए बाल वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण और विज्ञान के नए आयामों पर संवाद किया। उन्होंने कहा, “हमारे सीमांत क्षेत्रों के बच्चों में अपार प्रतिभा है। यह मंच उन्हें नई दिशा देगा और आने वाले कल के वैज्ञानिक यहीं से निकलेंगे।”
मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है।” उन्होंने याद दिलाया कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी बनने जा रही है — जो उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए गौरव की बात है।
🏗️ आपदा प्रबंधन केंद्र और ₹50 लाख की सौगात
सीएम धामी ने रुद्रप्रयाग में आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित करने की घोषणा की और ज़िलाधिकारी को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बनसू जाखधार में विकास कार्यों के लिए ₹50 लाख की घोषणा भी की।
कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, उद्यमी इंद्र सिंह रावत और डॉ. पाटनी को सम्मानित किया गया। साथ ही यूकॉस्ट की “रुद्रप्रयाग डैशबोर्ड” पुस्तक का विमोचन हुआ — एक ऐसा GIS आधारित रिमोट सिस्टम जो जिले की सभी विकास योजनाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ देगा।
🌍 थीम: जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम प्रबंधन
इस वर्ष बाल विज्ञान महोत्सव की थीम रही — “जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियाँ एवं आपदा जोखिम प्रबंधन का एकीकरण।”
इसका उद्देश्य है कि बच्चों में विज्ञान के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय समाधान की भावना को बढ़ावा मिले।










