🎯 राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा — उत्तराखंड की 25 वर्ष की यात्रा विकास, शौर्य और संवेदना की मिसाल है

उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर सोमवार को आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि “देवभूमि उत्तराखंड ने 25 वर्षों में विकास, संवेदना और शौर्य के नए आयाम गढ़े हैं।”
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं—सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल, गौरा देवी जैसी—हमेशा से राज्य की ताकत रही हैं, और अब विधान सभा की पहली महिला अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी भूषण उस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में विधान सभा में महिला प्रतिनिधित्व और भी बढ़ेगा।

अपने संबोधन में उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा की सराहना की और कहा कि यह निर्णय संविधान निर्माताओं की उस भावना को साकार करता है जो नागरिकों के समान अधिकारों पर आधारित है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संसदीय व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति जनता के प्रति जवाबदेही है — यही लोकतंत्र की आत्मा है।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा आर्थिक समृद्धि, सुशासन, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय का स्वर्णिम काल रही है। उन्होंने “समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण” को प्रदेश के भविष्य का मंत्र बताया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड हमारी माताओं, बहनों और आंदोलनकारियों के संघर्ष और त्याग का प्रतीक है,” और विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और जनता के सहयोग से राज्य आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रेरक शब्द उत्तराखंड की मातृशक्ति और लोकतांत्रिक परंपरा दोनों के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा ने अब ग्रीन और डिजिटल पहल के तहत पूरी तरह पेपरलेस दिशा में कदम बढ़ाया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अंत में कहा —
“उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और मानवीय संवेदनाओं को संरक्षित रखते हुए, राज्य को विकास के पथ पर आगे ले जाना हम सबकी जिम्मेदारी है। ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से आगे बढ़ना ही सच्ची देशसेवा है।” 🌿🇮🇳